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प्राय: हमारे संकल्प अधूरे क्यों रह जाते हैं?

3 वर्ष पहले
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हॉट एंड कोल्ड एम्पेथी गैप के कारण हमारी इच्छा शक्ति कमजोर पड़ जाती है

जब लोग आरामदेह ‘कोल्ड’ स्थिति में होते हैं तो वे गुस्सा, दर्द-तकलीफ जैसी ‘हॉट’ स्थितियों को कम करके आंकते हैं। जैसे जब हम निश्चिंत होते हैं तो दूसरों की चिंता नहीं समझते। ख्यात मनोवैज्ञानिक फ्रायड के पड़पोते और अमेरिकी अर्थशास्त्री जॉर्ज लोविंस्टीन ने इसे ‘हॉट एंड कोल्ड एम्पेथी गैप’ कहा है। वे बताते हैं कॅरिअर बदलने, लंबे रिश्ते को खत्म करने जैसे बड़े निर्णयों पर विचार करने में हमारी बहुत ऊर्जा खत्म हो जाती है और सही निर्णय लेने की इच्छाशक्ति और भी कम हो जाती है। तो हम क्या करें? स्टारबक्स जब बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही थी तोे नए कर्मचारी ‘ठंडी’ मानसिकता में तो अच्छी सर्विस देने की बातें करतें पर जब ‘गर्म’ स्थिति आती तो ग्राहकों पर झल्ला जाते या आपस में लड़ पड़ते। कंपनी ने कर्मचारियों को कई कड़ी परिस्थितियों पर प्रश्न दिए जैसे ‘जब कस्टमर मुझपर चिल्लाएगा तो मैं……….’। कर्मचारी शांत स्थिति में अपना रिस्पॉन्स लिख देते। दबाव की स्थिति में उन्हें ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। पहले से सोचा रिस्पांस दे देते और संयम नहीं खोते। यदि हम तय कर लें कि तनाव वाली स्थितियों में हम कैसे व्यवहार करेंगे तो हम भी स्थिति से निपट सकते हैं। व्यक्ति को योजना उसी स्थिति में बनानी चाहिए, जिस स्थिति में वह अमल में लाई जानी हो। जैसे छात्रों को पढ़ाई का टाइम-टेबल थके होने या तनाव में बनाना चाहिए ताकि वे अपनी क्षमता का ज्यादा अनुमान न लगा लें। नए साल के संकल्प भी इसीलिए पूरे नहीं होते, क्योंकि वे शांत और अनुकूल परिस्थितियों में बनाए जाते हैं। पर जीवन की गहमागहमी में उन्हें लागू करना कठिन होता है।



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