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रंगों की दौड़: दुनिया का सबसे बड़ा और खुशहाल रनिंग इवेंट

3 वर्ष पहले
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पेरिस| तस्वीर पेरिस में चल रही 5 किमी लंबे कलर रन की है। इसे ‘धरती पर सबसे खुशहाल 5 हजार मीटर दौड़’ भी कहा जाता है। इस रेस में जीत और हार का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। न ही कोई विनर होता है और न ही कोई प्राइज दिया जाता है। इस रेस से जमा होने वाले पैसे को बच्चों के इलाज पर खर्च किया जाता है। 4 साल में 57 करोड़ रुपए डोनेट किए गए हैं। दुनियाभर में सालाना अलग-अलग इवेंट में 100 देशों के करीब 2 करोेड़ लोग हिस्सा लेते हैं। मकसद लोगों को पास लाना और धरती को सबसे खुशहाल बनाना है। इसमें प्रतिभागी 5 हजार मीटर की दूरी मस्ती के साथ रंग खेलते हुए पूरी करते हैं। मौज-मस्ती करते हैं, ताकि प्रतिभागी रोजमर्रा के ऑफिस के कामकाज के तनाव से खुद को बाहर निकाल सके।

2011 में 6 हजार लोग जुटे थे, अब दो करोड़ लोग

पहली बार 2011 में फिनिक्स में छह हजार लोगों ने इसमें हिस्सा लिया था। अब 100 से ज्यादा देशों के 2 करोड़ लोग हिस्सा लेते हैं।

खुशी की दौड़ में न कोई विनर, न अवॉर्ड

मौज-मस्ती के साथ रंग खेलते हुए दौड़ते हैं। इसमें न कोई विनर होता है और न ही कोई प्राइज मिलता है।

7 साल पहले यह रेस होली और मड रेस से प्रेरित होकर शुरू हुई

दुनिया की सबसे खुशहाल 5 हजार मीटर दौड़; 100 देशों के 2 करोड़ लोग अलग-अलग शहरों में रंगों के साथ दौड़ते हैं, इवेंट से आने वाले पैसे बच्चों के इलाज पर खर्च होते हैं

एलएलसी कंपनी के ट्रेविस स्नाइडर का यह कॉन्सेप्ट है। उनका मकसद नौकरी-पेशा व युवाओं को एक साथ लाकर उन्हें मस्ती के लिए उत्साहित करना था।

दुनियाभर में हो रहे रंगों के कार्यक्रम जैसे कि होली, लाइफ इन कलर और मड रेस से ये आइडिया आया। 2014 में इसे डोनेशन और हेल्थ अवेयरनेस से जोड़ा।

तब से एलएलसी इस रेस से जुटने वाले पैसे को बच्चों के इलाज पर खर्च करती है। कंपनी चार साल में 57 करोड़ रुपए जुटाकर दान कर चुकी है।

इस रेस में हिस्सा लेने के लिए प्रतिभागी को 24 डॉलर (1500 रुपए) खर्च करने पड़ते हैं। पर यह राशि अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से तय होती है।

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