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मोदी ने पुतिन को अटल की याद दिलाई, कहा- आप 18 साल से हमारे करीब हैं

3 वर्ष पहले
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रूस में सीरियस एजुकेशनल सेंटर गए प्रधानमंत्री मोदी, वहां बच्चों से भारत आने के लिए कहा

बोटिंग के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन सोची के रशिया-एथनो सेंटर गए। यहां वे सीरीयस एजुकेशनल सेंटर पहुंचे। यहां उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए भारत आने की अपील की। इस सेंटर की स्थापना दिसंबर 2014 में पुतिन की पहल पर की गई थी। यह सेंटर कम उम्र में ही बच्चों का टैलेंट उभारने का काम करता है। यहां आर्ट, स्पोर्ट्स और नेचुरल साइंस से लेकर टेक्निकल क्रिएटीविटी पर विशेष काम किया जाता है। इस काम को अंजाम देने में 100 टीचर और कोच लगे हुए हैं। हर महीने यहां 600 बच्चे पहुंचते हैं, जो 10 से 17 साल की उम्र के होते हैं। बिना फीस उनका हुनर निखारा जाता है।

पुतिन से बोट में चर्चा की, मोदी की ये चौथी बोट डिप्लोमैसी है

सोची में राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी ने नाव पर काला सागर की सैर की। उन्होंने व्यक्तिगत बातें भी की।

मोदी ने 3 घंटे में सात बार किया वाजपेयी का जिक्र

मोदी ने पुतिन के साथ शुरुआती बातचीत में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की याद िदलाते हुए उनके नाम का 7 बार जिक्र किया।

मोदी वार्ता शुरू होने से लेकर काला सागर में बोटिंग तक 7 घंटे पुतिन के साथ रहे।

अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण यातायात गलियारा और ब्रिक्स पर रूस और भारत साथ काम कर रहे है। शंघाई सहयोग संगठन में सदस्य बनवाने पर रूस काे शुक्रिया कहा।

यह पीएम मोदी की किसी राष्ट्राध्यक्ष के साथ दूसरी अनौपचारिक वार्ता है। 24 दिन पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पहली अनौचारिक वार्ता की थी।

रक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई

मोदी और पुतिन के बीच अनौपचारिक वार्ता में रक्षा क्षेत्र और वर्तमान हालात को लेकर भी वार्ता हुई। इसके अलावा, ऊर्जा, एशिया में सुरक्षा, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन में भागीदारी बढ़ाने, यूएन में साझेदारी बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई। गौरतलब है कि रूस और भारत के बीच 18 साल से शिखर वार्ता होती आ रही है। इसकी शुरुआत 2000 में नई दिल्ली में रूस के राष्ट्रपति पुतिन की पहली यात्रा से हुई थी। उसके बाद से एक साल भारत और एक साल रूस यात्रा की मेजबानी करता है।

अनौपचारिक बैठक से वार्ता का माहौल बनता है

अनौपचारिक वार्ता किसी ट्रीटी या एग्रीमेंट का हिस्सा नहीं बनती। लंबे वक्त से भारत, रूस से कटा-कटा है। जितना हम अमेरिका के करीब आते गए, रूस दूर होता गया। आज दो पोल बन गए हैं, एक- एशिया-पैसिफिक में जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका। दूसरा- गल्फ में चीन, रूस, सीरिया, ईरान है। भारत को इसमें बैलेंस बनाना है। लिहाजा मोदी को प्रतिनिधिमंडल के साथ जाने के बजाय अनौपचारिक वार्ता ज्यादा सही लगता है। चूंकि अनौपचारिक मुलाकात में एजेंडा तय नहीं होता है। इसीलिए जब देशों के प्रमुख बैठते हैं तो बातचीत का माहौल तैयार होता है।

4 साल में यह चौथी बोट डिप्लामेसी है। वे हर बार अलग राष्ट्रपति के संग रहे।

2015 में पहली बार फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद के साथ सीन नदी में सैर की थी।

2018 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों संग गंगा नदी पर बोट पर चर्चा की।

2018 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चीन के वुहान शहर की ईस्ट लेक में बोट पर बात की।

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