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धरने पर डटे सफाईकर्मियों की 3 मांगें भी सरकार को मंजूर नहीं, कूड़े से आवागमन तक हुआ बाधित

3 वर्ष पहले
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सरकार व नपा के सफाई कर्मचारियों के बीच सुलह होती दिखाई नहीं दे रही। कर्मचारी तीन मांगों को लेकर सातवें दिन भी धरने पर डटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार ने सभी मांगे खारिज कर दी तथा एस्मा लगाकर इन्हें हटाने की तैयारी में है। इस टकराव के चलते नालियां और आम रास्ते गंदगी से सड़ने लगे हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

बता दें कि सभी विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तथा सफाई कर्मचारियों की भारी किल्लत है। व्यवस्था सुचारु रखने के लिए आउट सोर्सिंग के तहत नांगल चौधरी नपा में 25 सफाईकर्मी भर्ती किए गए थे। जिन्हें वार्ड स्तर की नालियां, रास्तों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। रोस्टर के मुताबिक एक कर्मचारी को आठ घंटे ड्यूटी देना अनिवार्य कर दिया है। नियुक्ति पत्र मिलने के कुछ दिन बाद कर्मियों ने यूनियन का गठन कर लिया। अब सर्व कर्मचारी संघ का समर्थन लेकर कच्चे कर्मियों को पक्का करने, समान काम समान वेतन तथा ठेकेदारी प्रथा को खत्म कराने के लिए धरना शुरू कर दिया। पहले 14 मई तक धरना निर्धारित था, लेकिन सरकार द्वारा सभी मांगें खारिज करने तथा हटाने का अल्टीमेटम देने पर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। कचरे का उठान नहीं होने के कारण अधिकतर वार्डों की नालियां बाधित हो गईं।

ओवरफ्लो के चलते रास्तों में गंदा पानी एकत्रित हो गया, जिसकी बदबू से लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो गया। वार्ड-10 में टेलीफोन एक्सचेंज के पास नाली की पानी निकासी बंद हो गई। नाली के कीटाणुओं से आंगनबाड़ी सेंटर, प्राथमिक पाठशाला के बच्चों को बीमारी का खतरा बढ़ गया। अस्थाई सब्जीमंडी में छिलकों का ढेर एकत्रित हो गया। समाधान की प्रक्रिया अटकने से शहरवासियों की मुसीबत बढ़ गई। सफाई कर्मियों का कहना है कि सरकार के निर्देशानुसार रात को भी सफाई करते हैं, इसके बावजूद सरकार उनकी मांग मानने को तैयार नहीं। ठेकेदार मनमर्जी से कर्मचारी को हटा देता है, कभी समय पर पगार नहीं देता। जिस कारण उन्हें वर्कलोड से जूझने के साथ नौकरी हटने की चिंता रहती है। गुस्साए कर्मचारियों ने कहा कि 17 मई तक शांति पूर्वक धरने रहेंगे। इसके बाद यूनियन के निर्देशानुसार सड़कों पर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।

नांगल चौधरी. धरने पर बैठे सफाई कर्मचारी ।

समस्या का समाधान उच्च स्तर पर संभव

नपा के सचिव प्रदीप कुमार ने बताया कि सफाई कर्मियों की प्रदेश स्तरीय हड़ताल है। इनकी मांगें पूरी करना सरकार पर निर्भर है। सफाई नहीं होने के कारण सभी वार्डों के हालात खराब हो गए। एस्मा लगाने के अभी कोई आदेश नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि धरना खत्म होने पर ही गंदगी से निजात संभव है।

हठ पर अड़ी सरकार, सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मान रही

नांगल चौधरी यूनियन के प्रधान सुनील कुमार ने बताया कि समान काम समान वेतन देने की मांग खारिज करके सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का मजाक उड़ाया है। इससे साबित हो गया कि सरकार कर्मचारी हितैषी नहीं है। उन्होंने कच्चे कर्मियों को पक्के करने, ठेकेदारी प्रथा खत्म करने तथा समान काम समान वेतन देने का मांगपत्र निकायमंत्री कविता जैन को दिया था। इस पर अमल नहीं होने के कारण मजबूरन धरने पर बैठना पड़ा है।

शहर में कूड़े के लगे ढेर और प्रशासन नहीं कर पाया सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था

भास्कर न्यूज| महेंद्रगढ़

नगर में सातवें दिन भी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते साफ-सफाई का बुरा हाल रहा। हड़ताल के चलते नगर में सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक मौन साधे हुए हैं। इससे नगर के गली- मोहल्ले ही नहीं मेन बाजार भी कूड़ा बाजार बन गए हैं। जरूरत के इस समय में सामाजिक संगठन भी लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी सफाई जैसी व्यवस्था को दुरुस्त बनाने को लेकर कोई पहल करते नजर नहीं आ रहे हैं, जबकि प्रधान सचिव स्थानीय निकाय की ओर से जारी पत्र के अनुसार शहरों में सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हुए हैं। लोगों ने जिला प्रशासन से शीघ्र सफाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।

सफाई कर्मचारियों की ये हैं प्रमुख मांगें

तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को बिना लाभ- हानि के 100-100 गज के प्लॉट देने या आवासीय कालोनियों का निर्माण करने

अग्निशमन, सीवर, विभाग टयूबवेल ऑपरेटरों को त्योहारी छुट्टियों में काम करने पर प्रति वर्ष 600 रुपए से दिए जाते हैं। संघ मांग करता है कि कर्मचारियों को एक वर्ष में एक माह का वेतन दिया जाएं।

कुल सचिव के सभी पत्र, परिपत्र व हिदायत पालिका, परिषदों व निगमों के कर्मचारियों पर सीधे तौर पर लागू की जाए।

सीवरमैन व सफाई कर्मचारियों को सफाई भत्ता 350 रुपए से 1000 रुपए करने, वर्दी भत्ता 240 रुपए से 500 रुपए करने फायर कर्मचारियों सहित अन्य कर्मचारियों को धुलाई भत्ता 15 रुपए से बढ़ाकर 250 रुपए करने।

नियमित कर्मचारियों के वेतन से काटा गया, पेंशन शेयर जमा ने कराने वाली पालिका परिषदों व निगमों के अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन पेमेंट ऑर्डर सहित सभी प्रकार के सेवानिवृत्त लाभों का भुगतान सेवानिवृत्ति तिथि को ही किया जाए।

मृतक सेवानिवृत कर्मचारियों के मामलें में भी पोस्ट डेथ लाभ मृत्यु होने के एक माह के अन्दर- अन्दर करना सुनिश्चित किया जाए।

सफाई कर्मचारियों की संख्या के अनुपात में सफाई दरोगाओं के पद सृजित किए जाए।

पालिका परिषदों व निगमों में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की कमी के कारण इन पदों का कार्य सफाई कर्मचारियों, मालियों, बेलदारों, सीवरमैनों व अन्य चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से करवाया जा रहा है।

संघ की मांग है कि एक मात्र समय उपाय के रूप में नीति निर्धारित करते हुए। इन कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी के पदों पर पदोन्नति की जाए। 11 सफाई दरोगा, हेड माली, हेड सीवरमैन एवं मैट को तृतीय श्रेणी का वेतनमान दिया जाए।

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