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बगैर ट्यूशन-इंटरनेट, सेल्फ स्टडी से पाई सफलता

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | महेंद्रगढ़/नारनौल

मेहनत कभी बेकार नहीं जाती है, यदि लक्ष्य निर्धारित करके पढ़ा जाए तो फिर सफलता मिलती है। ऐसा ही कुछ कहना है हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा में नॉन मेडिकल स्ट्रीम में प्रदेशभर में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली स्वीटी टॉप-थ्री में शामिल धीरज का। दोनों ही विद्यार्थी मानते हैं कि कॉन्सेप्ट क्लियर हो और सेल्फ स्टडी ही सफलता दिला सकती है।

शुक्रवार बोर्ड के परीक्षा परिणाम घोषणा के बाद स्वीटी और धीरज अपनी स्टडी के प्रयोग के बारे में भास्कर साझा किए। महेंद्रगढ़ के ग्लैक्सी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बवानिया की छात्रा स्वीटी ने विज्ञान संकाय में 500 में से 489 अंक लेकर हरियाणा में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। स्याणा गांव निवासी स्वीटी बताती है कि स्कूल से जाने के बाद घर पर पांच से छह घंटे प्रतिदिन पढ़ी। उस दौरान जो डाउट आए, उनको नोट किया। स्कूल पहुंचने पर संबंधित अध्यापकों से अपने डाउट को क्लियर किए। परीक्षा तैयारी के दौरान उसने ना ही तो ट्यूशन किया और ना ही इन्टरनेट का। स्कूल अध्यापकों के बताए हुए राइटर की किताबें ही उसकी तैयारी का मुख्य केंद्र रहे। किताबों से जब वो बोर हो जाती थी तो अपने भाई के साथ म्यूजिक सुनती थी। संयुक्त परिवार होने से सभी के बच्चे शाम को संयुक्त रूप से ही पढ़ते थे। इससे एक दूसरे से ज्यादा समय तक पढ़ने की जिद का भी इस सफलता में ज्यादा सहयोग रहा।

प्रदेशभर में दूसरी रैंक मिलने पर पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ

संयुक्त परिवार होने के बावजूद परिवार के सदस्यों खासकर माता किस्मती देवी-पिता पप्पू यादव ने उसे कभी किसी घर के काम के लिए दबाव नहीं डाला। स्कूल में अध्यापकों व घर पर परिवार के सदस्यों से मिले सहयोग के कारण ही उसके इतनी अच्छे अंक आ सके हैं। प्रदेशभर में दूसरा स्थान आने की सूचना उसे स्कूल अध्यापकों से मिली तो पहले तो उसे विश्वास नहीं हुआ, लेकिन बात में जब टीवी पर अपना नाम देखा तो स्कूल में पहुंची। यहां उन्होंने स्कूल अध्यापकों से आशीर्वाद लिया है।

ध्यान भटकने लगे तो किताब रख देनी चाहिए, माइंड फ्रेश होने पर ही दोबारा उठाएं

नारनौल | विज्ञान सबसे रोचक सब्जेक्ट है। इसको रटने की बजाय कॉन्सेप्ट क्लियर होना चाहिए। इनमें जितना अंदर घुसते हैं उतना ही मजा आता है। अगर क्लास में अच्छे से पढ़ाया और पढ़ा जाए तो ट्यूशन या कोचिंग की भी कोई जरूरत नहीं होती, सेल्फ स्टडी 6-7 घंटे नियमित रुप से पर्याप्त हैं। यह कहना है टॉप-3 में शामिल धीरज यादव का। इन्हीं टिप्स की बदौलत धीरज ने विज्ञान संकाय में 487 अंक लिए हंै। नांगल चौधरी रोड स्थित भुंगारका निवासी धीरज गांव में ही स्थित बाला जी सीनियर सेकेंडरी का छात्र है। 481 अंक लेकर वह 10वीं कक्षा में ब्लॉक लेवल पर अव्वल रहा था। वह आश्वस्त था 12 वीं में अच्छे अंक लाएगा, लेकिन स्टेट में कोई पॉजिशन आएगी इसका उसे आभास नहीं था। जब सबसे पहले दैनिक भास्कर ने उसे उसकी पॉजिशन के बारे में बताया तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पढ़ाई कैसे की इस सवाल पर उसने कहा कि जो स्कूल में पढ़ाया जाना होता था उसको सुबह पढ़कर जाता था। फिर शाम को आकर पढ़ता था और अपने नोट्स तैयार करता था। कुछ समझ नहीं आता तो क्लास में टीचर से क्लियर करके ही नोटबुक में लिखता था। धीरज का कहना है कि पढ़ते समय पूरा ध्यान टॉपिक पर होना चाहिए। इधर-उधर ध्यान भटकने लगे तो किताब रख देनी चाहिए और जो दिमाग में आ रहा होता है उसको निकालकर ही किताब उठानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो कभी ध्यान टॉपिक पर तो कभी फालतू की बात पर जाएगा। इससे टाइम वेस्ट होता रहेगा और टॉपिक भी क्लियर नहीं होगा। इसलिए दिमाग को फ्रेश करके ही पढ़ना चाहिए। पढ़ाई नियमित होनी चाहिए।

आईपीएस बन देशसेवा करना है लक्ष्य भविष्य में उनका लक्ष्य क्या है के संबंध में स्वीटी ने बेबाक कहा कि वो आईपीएस बनकर देश सेवा करना चाहती है। आईपीएस बनने के पीछे उनका तर्क था कि आज देश व प्रदेश में क्राइम बढ़ रहा है। खासकर महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं आम है। वो महिलाओं को जागरूक कर ना केवल उनका अधिकार दिलाना चाहती है, अपितु उनपर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लड़ना चाहती हैं।

आईआईटी करना लक्ष्य : धीरज का कहना है कि उसका आईआईटी मेन्स भी क्लियर है तथा अब वह एडवांस की तैयारी कर रहा है। चयन हो गया तो ठीक है। अन्यथा इस साल तैयारी करेंगे, लक्ष्य आईआईटी करना ही है।

मोबाइल पर होता है टाइम वेस्ट-धीरज का कहना है कि उसके पास कोई मोबाइल नहीं है। घर के यूज के लिए सिंपल फोन है। वह भी मम्मी के पास रहता है। मैं कई साथियों को महंगे फोनों पर टाइम वेस्ट करता देखता हूं तो अच्छा नहीं लगता है। मेरे पास लैपटॉप है। इसको यूज करता हूं।

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