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बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को नहीं मिल रहे खरीदार

3 वर्ष पहले
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सब्जी की बंपर पैदावार होने के बाद भी मंडी में किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। किसान औने-पौने दामों में अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं। जिसके कारण किसानों को खेत से मंडी तक सब्जी पहुंचाने किराया भी नहीं मिल पा रहा है। किसानों की दुर्दशा के कारण आढ़ती भी परेशान हैं, लेकिन दुकानदार सब्जी को दस गुणा अधिक दामों में बेचकर चांदी कूट रहे हैं।

लागत मूल्य की बात तो बहुत दूर किसानों को खेत से मंडी तक का किराया भी जेब से देना पड़ रहा है। सब्जी मंडी में हालात यह हैं कि टमाटर 80 पैसे किलाे, लौकी 3 रुपए, करेला 4 रुपए, हरी मिर्च 7 रुपए, भिंडी 10 रुपए, बंद गोभी 3 रुपए और कद्दू 1 रुपए किलो बिक रहा है। इन सब्जियों में सबसे बदतर हालात टमाटर और हरी मिर्च के हैं। जहां प्रति एकड़ जमीन का ठेका 44 हजार रुपए सालना है। इसके बाद महंगे बीज, पानी, लेबर और खाद पर लाखों रुपए खर्च करने के बाद किसान अपनी टमाटर की फसल मुफ्त में देने को तैयार है। इतना पैसा किसान टमाटर को तोड़ने में और उसे मंडी तक पहुंचाने में खर्च कर देता है जिसका आधा भी उसे नहीं मिल पा रहा है।

यही हालात हरी मिर्च के हैं जिसको तोड़ने का खर्च 6 रुपए प्रति किलो है। 6 जबकि मंडी में हरी मिर्च के दाम केवल 7 रुपए है। देखा जाए तो किसान इन हालात में अपनी फसल बेचकर क्या करेगा। किसानों पर बैंकों और साहूकारों का कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

बाजार में टमाटर 10 रुपए किलो: थोक मंडी के विपरीत बाजार में आज भी टमाटर 10 रुपए किलो मिल रहा है। जहां किसानों को नुकसान हो रहा है, वहीं आम आदमी को कम दाम का लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसान अब आधुनिक तकनीक से खेती करता है। नई तकनीक व उन्नत बीजों के चलते टमाटर की बंपर पैदावार है। कुछ समय पहले क्षेत्र के टमाटर की दूसरे राज्यों में भी मांग थी, लेकिन अब टमाटर की फसल किसानों को रुला रही है।

खाद्य पदार्थ बनाने वाली इकाइयां नहीं : पहले प्याज, फिर आलू और अब टमाटर किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। शहर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में टमाटर का बंपर उत्पादन होता है। बावजूद इसके फल व सब्जियों पर आधारित कोई उद्योग यहां नहीं है। जिसके कारण किसानों को सीजन के समय घाटा उठाना पड़ता है। यदि क्षेत्र में आलु और टमाटर के उत्पाद बनाने की कोई इकाई होती तो किसानों की यह हालत न होती।

नारायणगढ़ की मंडी में एक दुकान पर बिकने के लिए आया टमाटर।

भावांतर योजना का नहीं उठा सके लाभ

जागरुकता की कमी और प्रचार के अभाव में क्षेत्र के किसान भावांतर योजना का लाभ नहीं उठा सके हैं। सरकार ने मंडी में सब्जी व फल की कम कीमत के जोखिम को कम करने के लिए भावांतर योजना लागू की है। योजना के तहत यदि आलू की पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ है तो उसका 400 रुपए मूल्य निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार प्याज 100 क्विंटल प्रति एकड़ का भाव 500 रुपए प्रति क्विंटल, टमाटर 140 क्विंटल प्रति एकड़ का भाव 400 रुपए और फूल गोभी 100 क्विंटल प्रति एकड़ 500 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। क्षेत्र के एक भी किसान ने इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है।

भावांतर योजना के तहत किसानों को जागरूक करने के लिए गांव-गांव जाकर बताया गया था। बावजूद इसके टमाटर का उत्पादन करने वाले मात्र एक किसान ने ही रजिस्ट्रेशन करवाया था। प्याज की फसल के लिए क्षेत्र के 32 किसानों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। खुर्शीद अहमद, सचिव मार्केट कमेटी, नारायणगढ़।

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