महाड से शुरू हुई हक की लड़ाई
1927 का महाड सत्याग्रह आंबेडकर के राजनीतिक विचार व कर्म में मील का पत्थर था। यह सत्याग्रह महाराष्ट्र के महाड कस्बे में गांधीजी के दांडी मार्च से तीन साल पहले 30 मार्च 1927 को हुआ था। उन्होंने वहां के एक तालाब से पानी लेने के दलितों के आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने ख्यात बयान में कहा था, ‘हम सिर्फ तालाब से पानी पीने नहीं जा रहे हैं बल्कि हम यह कहना चाह रहे हैं कि हम भी अन्य लोगों की तरह मानव हैं। सभा समानता स्थापित करने का मानदंड तय करने के लिए बुलाई गई है।’
पहले कानून मंत्री बने
15 अगस्त 1947 को जब ब्रिटिश सरकार ने सत्ता हस्तांतरण किया तो कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने डॉ. आंबेडकर को देश का पहला कानून मंत्री बनने का अनुरोध किया, जिसे डॉ. आम्बेडकर ने स्वीकार किया। 19 अगस्त को उन्हें संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी का चेअरमैन बनाकर भारतीय संविधान लिखने की प्रक्रिया का नेतृत्व सौंपा गया। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने उनके नेतृत्व में तैयार संविधान स्वीकार किया।
बौद्ध धर्म ग्रहण किया
1950 में डॉ. आंबेडकर श्रीलंका में बौद्ध सम्मेलन में गए। इसके बाद वे रंगून के बौद्ध सम्मेलन में भी गए। इसके पहले वे पूरी ज़िंदगी बौद्ध धर्म का अध्ययन करते रहे थे। 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में उन्होंने प|ी के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार किया। फिर वहां एकत्रित उनके 5 लाख अनुयायियों ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया।