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बिना परमिशन फॉरेस्ट की जमीन पर चल रहीं 60 खानें

3 वर्ष पहले
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माइंस डिपार्टमेंट में किस कदर मनमर्जी का खेल चल रहा है जरा एक उदाहरण देखिए। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से बिना एनओसी लिए प्रदेश में 60 माइंस का ट्रांसफर कर दिया गया है। उस पर माइंस इंजीनियर से लेकर वन विभाग के अफसरों तक के स्तर पर आपत्ति नहीं की गई। खान राज्यमंत्री सुरेंद्र पाल सिंह टीटी के पास एक शिकायत के आधार पर कराई गई जांच में पूरे मामले का खुलासा हुआ है। खास यह है कि खुलासे के बावजूद खान विभाग के अफसर गलती मानने को तैयार नहीं है, जबकि वन विभाग के फील्ड अफसरों की हालत यह रही कि खानों में खनन होता रहा और किसको कानोंकान खबर तक नहीं। अब वन अफसर खान विभाग पर भारतीय वन संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं।

लगभग ढाई साल पहले माइंस डिपार्टमेंट ने उदयपुर की एक माइंस के ट्रांसफर लीज को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी न मिलने का हवाला देकर निरस्त कर दिया था। वह ट्रांसफर लीज आज भी निरस्त है। इसके ठीक उलट उसी एनओसी न मिलने के आधार पर ही अलग-अलग जिलों में 60 माइंस चल रही हैं, लेकिन उस पर किसी भी अफसर की निगाह नहीं पड़ रही है। ये जो माइंस चल रही है, इनका ट्रांसफर 2008 से 2016 के बीच किया गया है। इस मामले में खान राज्यमंत्री ने वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से भी पूरे मामले में सुझाव मांगा था, जिस पर मंत्री कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि लीज ट्रांसफर कराने से पहले केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति लेनी जरूरी है।

खान विभाग वन विभाग
2010 से पहले माइंस की लीज ट्रांसफर कराने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी लेने की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब कोई जरूरत नहीं है। केवल तय रकम जमा कराने के बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से डीम्ड एनओसी माना जाता है। -डीएस मारू, निदेशक खान निदेशालय

मामला संज्ञान में है। जांच में खान विभाग के स्तर पर गलती पाई गई तो गलत तरीके से चल रही माइंस को बंद करेंगे और दोषी अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। -सुरेंद्र पाल सिंह टीटी, खान राज्यमंत्री

बिना एनओसी चल रही ये माइंस : बाबा रामदेव मारबल, एनएन स्टोन प्राइवेट लिमिटेड, वंडर मारबल की 12 माइंस, कैंपस स्टोन, न्यू एज मारबल एंड माइंस, श्री कृपा मारबल एंड माइंस, नीरज मोदी, तरुण लोधा, त्रिपुरा मारबल एंड गारंटी, वीडीएच ईको एनर्जी इंटरप्राइजेज, वीशी माइंस एंड मिनरल, सारव श्री मनन मारबल की दो माइंस, श्री शिवम नेचुरल प्राइवेट लिमिटेड, सोलंकी ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड, सारवा श्री रामपुरा मिनरल, अमर ज्योति ग्रेनाइट प्राइवेट लिमिटेड की दो माइंस, ब्रिजेश कवंर शेखावत, रुमणि देवी चौधरी, प्रभाकरन, पी रवींद्रम, हेमेंद्र कुमार राजपूत की दो, नयना देवी, प्रवीन त्रिवेदी, गणेश लाल पटेल, जीडी पुरोहित, सुनील कुमार देवरा, मंडवा मारबल की दो माइंस, एस मुख्यतियार अहमद, मिनरल ओरिएंटेड, रेखराम चौधरी, प्राइम स्टोन की दो माइंस, सुखदेव प्रवास व्यास, सीताराम सोमानी, नारवेस्ट हिल प्राइवेट लिमिटेड, जेपी मिनरल, अनिता चौधरी, अमन अग्रवाल, मिनरल ओरिएंटेड, ग्रीन किंग, बालचंद की दो माइंस, राठी ग्रीन ।

किसी भी माइंस की लीज ट्रांसफर करने से पहले उसे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास आवेदन करना होता है। मंत्रालय से एनओसी मिलने के बाद तय रकम जमा कराने के बाद लीज ट्रांसफर कानूनी तौर पर सही मानी जाती है। एके सिंह, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एफसीए

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