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ई-वेस्ट को पुन : उपयोग में लाने की सामग्री की पहली फैक्ट्री इन्होंने बनाई
लैपटॉप, स्मार्टफोन कंप्यूटर सर्किट बोर्ड्स ये सब जब किसी काम के नहीं रहते तो ई-वेस्ट हो जाते हैं। इसे 3डी प्रिंटिंग के लिए सेरामिक और प्लास्टिक फिलामेंट्स में तब्दील करने का दुनिया का पहला कारखाना आईआईटी कानपुर में पढ़ी प्रोफेसर वीना ने लगाया है। वे ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में मटेरियल साइंटिस्ट हैं। 2011 में विज्ञान पर काम करने के लिए प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित वीणा पहली महिला हैं, जिनको भारतीय विज्ञान अकादमी ने प्रतिष्ठित जुबली प्रोफेसरशिप जैसा पुरस्कार दिया है। वे ऑस्ट्रेलिया में सर्वाधिक इनोवेटिव इंजीनियर मानी जाती है। ऑस्ट्रेलिया के प्रथम सौ इनोवेटिव विनर में ये भी शामिल हैं। मुंबई में पैदा हुई वीणा ऑस्ट्रेलिया में सेंटर फॉर सस्टेनेबल मटेरियल्स रिसर्च और टेक्नोलॉजी (स्मार्ट) की डायरेक्टर हैं। उनका एक और आविष्कार ‘ग्रीन स्टील’ के रूप में हैं, जो पर्यावरण हितैषी तकनीकी है, जिसमें रबर टायर को रीसाइकल कर स्टील के उत्पादन में काम में लिया जाता है और ‘ग्रीन स्टील’ बनाते हैं।
आईआईटी में पढ़ने के बाद वीणा कनाडा में मास्टर्स डिग्री करने गईं, वहीं उनकी मुलाकात राम महापात्र से हुई। वीणा सिंधी थीं और राम उड़िया मूल के हैं, दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद अमेरिका से मटेरियल साइंस में डॉक्टरेट किया। घर में भी खाना बनाने के लिए वे टायर और प्लास्टिक वेस्ट को ही ईंधन के रूप में इस्तेमाल करती हैं।
आयु- करीब 50 वर्ष शिक्षा- आईआईटी कानपुर, मेटलार्जिकल डिपार्टमेंट परिवार- पति राम महापात्र, दो जुड़वा बेटियां- मीरा और तारा
क्यों चर्चा में- ई-वेस्ट को फिर से प्रयोग में लेने वाली सामग्री में तब्दील करने की दुनिया की पहली फैक्ट्री लगाई है।