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रोडवेजकर्मियों को सातवां वेतनमान तो दूर डेढ़ साल में बढ़ा 10% डीए तक नहीं मिला

3 वर्ष पहले
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राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ मिलना तो दूर की बात रही, उन्हें डेढ़ साल में तीन बार बढ़ा 10 प्रतिशत डीए तक अभी नहीं मिला। रोडवेज के सिस्टम की चौंकाने वाली बात तो यह है कि रोडवेज के 18 हजार कर्मचारी और साढ़े छह हजार पेंशनर्स यह लाभ लेने के लिए जिन अधिकारियों से मांग कर रहे हैं, वे अधिकारी महीनों पहले ही बढ़े हुए डीए और 7वें वेतनमान का फायदा ले चुके हैं। रोडवेज में बड़े पदों पर बैठे दो आईएएस, दो आरएएस सहित 8 अधिकारी ऐसे हैं, जो बढ़ा डीए और 7वां वेतनमान ले रहे हैं। बड़े पदों पर बैठे इन अधिकारियों पर ही कर्मचारियों के हित में निर्णय लेने की जिम्मेदारी है। कर्मचारियों का कहना है कि जब बड़े अधिकारी बढ़े डीए और 7वें वेतनमान का लाभ ले चुके हैं तो वे हमारी पीड़ा को कैसे समझेंगे। दरअसल, रोडवेज में आईएएस और राज्य सेवा से आए अफसरों को राज्य सरकार के आदेश जारी होते ही बढ़े वेतन और भत्तों का लाभ मिलने लगता है, जबकि राज्य कर्मचारियों के वेतन या डीए में किसी तरह की बढ़ोतरी पर रोडवेज कर्मचारियों को सरकार के आदेशों के बाद अलग से आदेश निकालना पड़ता है, लेकिन यह अधिकारी अभी तक आदेश नहीं निकाल रहे हैं। इस पूरे मसले पर परिवहन मंत्री से लेकर अफसर तक कोई बोलने को तैयार नहीं है।

समस्या-समाधान कमेटी में विभाग के मंत्री, फिर भी कर्मचारियों को राहत नहीं : कर्मचारियों की मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए कार्मिक विभाग ने 3 मंत्रियों की कमेटी का गठन किया है। इसकी लगातार बैठक भी हो रही है। इसमें परिवहन मंत्री यूनुस खान भी एक सदस्य हैं। इसके बावजूद रोडवेज कर्मचारियों की मांग का मुद्दा उस बैठक से नदारद है और विभाग के मंत्री भी 18 हजार कर्मचारियों की मांगों को लेकर उदासीन हैं। इस कमेटी में अन्य दो मंत्री पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड़ और सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक हैं।

कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए बनी कमेटी में विभाग के मंत्री होने के बावजूद हमारी मांग पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। डीए और सातवां वेतनमान देने का निर्णय लेने की जिम्मेदारी रोडवेज में बड़े पदों पर बैठे जिन अधिकारियों पर है, वे तो पहले ही यह लाभ ले चुके हैं। वे हमारी परेशानी को क्या समझेंगे। हमारे साथ दोगला व्यवहार किया जा रहा है। - हनुमान सहाय भारद्वाज, महासचिव, राजस्थान परिवहन निगम मजदूर कांग्रेस इंटक

सिस्टम का सच
रोडवेज में 2 आईएएस, 2 आरएएस सहित राज्य सेवाओं के आठ अफसर ले रहे बढ़ा डीए और 7वां वेतनमान, 18 हजार रोडवेजकर्मियों को डीए के ही नहीं मिले 78 करोड़ रुपए

यह है बकाया डीए का गणित
अवधि डीए % में बकाया राशि

जनवरी 2017 से जून 2017 तक 4% 18 करोड़ रु.

जुलाई 2017 से दिसंबर 2017 तक 3% 30 करोड़ रु.

जनवरी 2018 से अब तक 3% 30 करोड़ रु.

कुल डीए बकाया - 78 करोड़ रुपए

ये ले चुके हैं डीए और 7वें वेतनमान का लाभ
उमेश कुमार (आईएएस) अध्यक्ष

कुलदीप रांका (आईएएस) प्रबंध निदेशक

यूडी खान (आरएएस) कार्यकारी निदेशक (यातायात)

मेघराज सिंह र|ू (आरएएस) कार्यकारी निदेशक (प्रशासन)

गोपाल विजय वित्तीय सलाहकार

नरेंद्र नाथ शर्मा कार्यकारी निदेशक (विधि)

राजकुमार महाप्रबंधक (वित्त)

अरुण नामा प्रोग्रामर

पिछले 3 सालों का इस प्रकार रहा है रोडवेज का घाटा

वर्ष कर्मचारी आय व्यय घाटा करोड़ रु. में

2014-15 20520 1833 2392 559

2015-16 19134 1707 2199 492

2016-17 17815 1836 2140 304

बिजली कंपनियों में रोडवेज से ज्यादा घाटा, फिर भी डीए

बिजली कंपनियों में रोडवेज से 30 गुणा अधिक घाटा है। रोडवेज में 3 हजार करोड़ का घाटा है, जबकि बिजली कंपनियों में 90 हजार करोड़ के घाटे के बावजूद कर्मचारियों को डीए, बोनस और 7वें वेतनमान का लाभ दे दिया गया है।

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