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प्रदेश में पोक्सो कोर्ट की कमी पर सीएस और श्रम सचिव हाईकोर्ट में तलब

3 वर्ष पहले
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लीगल रिपोर्टर. जयपुर | हाईकोर्ट ने प्रदेश के हर जिले में बच्चों के खिलाफ होने वाले लैंगिक अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट का गठन नहीं करने पर मुख्य सचिव व श्रम सचिव को 13 अप्रैल को अदालत में हाजिर होकर इस संबंध में स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। अदालत ने उनसे पूछा है कि इस बारे में कई बार पूछे जाने पर भी इस संबंध में जानकारी मुहैया क्यों नहीं कराई जा रही। न्यायाधीश एम.एन.भंडारी व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की याचिका पर दिया। अधिवक्ता प्रतीक माथुर ने अदालत को बताया कि पोक्सो अधिनियम की धारा 28 के अनुसार हर जिले में अलग से विशेष कोर्ट खोलने का प्रावधान है। विधि विभाग ने हर जिले में विशेष अदालत खोलने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन केवल जयपुर जिले में ही विशेष कोर्ट गठित की है। अन्य जिलों में डीजे और एडीजे स्तर की अदालतों को ही पोक्सो कोर्ट का कार्यभार सौंपा है। जबकि पोक्सो एक्ट के तहत बच्चों के खिलाफ होने वाले लैंगिक मामलों की सुनवाई अलग तरह से होती है और ऐसे में विशेष कोर्ट नहीं होने के कारण इन केसों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। अदालत ने कहा कि पिछली कई सुनवाई पर राज्य सरकार से विशेष कोर्ट खोलने, उनके लिए संसाधन मुहैया कराने और बजट की जानकारी बताने के लिए कहा था। लेकिन आदेश के पालन में अभी तक कोई सूचना नहीं दी है। इसलिए मुख्य सचिव व श्रम सचिव अदालत में पेश होकर मामले में जवाब दें।

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