गुरनाम की मौत कार्डिएक अरेस्ट से हुई थी न कि ब्रेन हैमरेज से : सिद्धू
रोडरेज के 30 साल पुराने मामले में आरोपी पूर्व क्रिकेटर एवं पंजाब के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे चेलमेश्वर और संजय किशन कौल की बेंच के सामने एक बार फिर से सिद्धू की ओर से केस के मेडिकल साक्ष्यों पर सवाल उठाए गए और दलील दी गई कि मृतक गुरनाम की मौत कार्डिएक अरेस्ट से हुई थी न कि ब्रेन हेमरेज से। हालांकि पंजाब सरकार पूर्व में ही कोर्ट के समक्ष अपने ही मंत्री के इस दावे को झुठलाते हुए कह चुकी है कि गुरनाम सिंह की मौत कार्डिएक अरेस्ट से हुई थी, इसका कोई साक्ष्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि जल्द ही कोर्ट मामले में अपना फैसला सुनाएगा।
बुधवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पंजाब के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से वकील आरएस चीमा ने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने दोबारा कोर्ट के समक्ष मेडिकल साक्ष्यों में अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में छह सदस्यीय डॉक्टरों के बोर्ड में शामिल उन डाॅक्टरों को गवाह के तौर पर शामिल नहीं किया, जिन्होंने मृतक की मौत को लेकर अपना भिन्न मत दिया था। पुलिस ने केवल उन्हीं को गवाह बनाया, जो उनके केस को सपोर्ट करते थे।
30 साल पुराने मामले में नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
पंजाब सरकार ने अपना स्टैंड नहीं बदला
12 अप्रैल को पंजाब सरकार ने हाइकोर्ट के फैसले के उस फैसले को सही करार दिया था, जिसके तहत गुरनाम सिंह की रोडरेज में हुई मौत के मामले में सिद्धू को दोषी करार देते हुए 3 साल की सजा दी गई थी। सरकार ने इस मामले में अपना स्टैंड बदलने से भी इनकार किया था। सरकार ने कहा था कि मृतक के कार्डिएक अरेस्ट से मौत होने के दावे को साबित करने संबंधी कोई साक्ष्य नहीं है।