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अमर हो गया सीताराम उपाध्याय, आंसू व आक्रोश के बीच एक झलक पाने को बेताब था हर कोई

3 वर्ष पहले
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पालगंज का सपूत सीताराम उपाध्याय (27) शहीद होकर अमर हो गया। आंसू व आक्रोश के बीच हर आम खास उसकी एक झलक पाने को बेताब थी। अंतिम दर्शन के लिए जुटी ऐतिहासिक भीड़ के बीच एक जनप्रतिनिधि की जुबान से बात फिसल गई कि यह सब हर किसी को नसीब नहीं होता है। उमड़ी सैलाब आंसुओं व आक्रोश का था। जहां से पाकिस्तान हाय-हाय की पुकार हो रही थी। तिरंगे के साथ तैनात लोगों में सीताराम के खोने का गम जरूर था, लेकिन गर्व इस बात की थी, जवान ने डेढ़ दर्जन से अधिक आतंकवादियों को भी पाताल पहुंचाया। युवाओं का कहना था कि सीताराम की शहादत बेकार नहीं जाएगी, बल्कि पीरटांड़ के हर घर में एक सीताराम पैदा होगा, और आतंकवादियों से लोहा लेने को तैयार होगा। पीरटांड़ के इस सपूत ने लोगों की आंखें खोल दी है, और इलाके के युवा वर्ग ने बदला का संकल्प लिया है। शुक्रवार की अहले सुबह सीताराम के शहीद होने की पहली सूचना उसकी प|ी रेशमा उपाध्याय को मिली थी। इसके बाद 15 मिनट के भीतर पूरे देश में यह खबर फैल गई। इस घटना से परिजन तो आहत थे ही पूरा इलाका शोक में डूब गया। जिसका असर शनिवार को तब दिखा, जब सीताराम का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से पैतृक गांव पालगंज पहुंचा। पालगंज से लेकर चिरकी व मधुबन की सभी दुकानें व बाजार स्वतः: बंद कर तमाम व्यवसायी शहीद सपूत की एक झलक पाने को बेताब थे। पालगंज मोड़ से लेकर डुमरी तक लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। भीड़ में हर आम व खास शामिल थे। इस बीच जांबाज जवान का शव ठीक 5:58 बजे मधुबन मोड़ पहुंचा। शव लदी सैन्य वाहन के पीछे हजारों का काफिला डुमरी से आ रहा था। मधुबन मोड़ पर ही ही सांसद रवीन्द्र पांडेय, विधायक निर्भय शाहाबादी सहित तमाम जनप्रतिनिधि व आम लोग मौजूद थे। जहां लोगों ने हाथ जोड़कर शहीद जवान को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद काफिला 6:04 बजे मधुबन गेस्ट हाउस पहुंचा। जहां एसपी, एएसपी, डीएसपी, सीआरपीएफ जवान सहित लोगों ने श्रद्धांजलि दी। 6:10 बजे काफिला मधुबन से निकला। वहां से 6:25 में नारायणपुर मोड़ पहुंची, जहां लंबे वक्त से इंतजार कर रहे लोगों ने श्रद्धांजली दी। फिर 6:40 में शहीद जवान का शव पालगंज मोड़ पहुंचा। जहां लोग सुबह से ही इंतजार कर रहे थे। पालगंज मोड़ में मौजूद बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से अपने लाल को नमन किया।

तिरंगा लेकर स्वागत को तैयार थे ग्रामीण

रात 8.45 हुआ अंतिम संस्कार

इसके बाद काफिला सीताराम की कर्मभूमि पालगंज पहुंची। जहां महिलाएं दो दिनों पलक बिछाए इंतजार कर रही थी। पालगंज मोड़ से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित घर तक तय करने में आधे घंटे से अधिक का वक्त लगा और काफिला घर 7:10 में पहुंची। शव पहुंचते ही प|ी रेशमा व मां किरण सहित घर की तमाम महिलाओं शव से लिपटकर रोने लगी। करीब एक घंटे तक दृश्य पूरी तरह से गमगीन रहा। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में करीब आधे घंटे लगे। फिर 8:45 बजे शव कुलमति घाट के लिए रवाना हुई। जहां शवयात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। महिलाएं व बच्चों की भी तादाद काफी रही।

पालगंज, मधुबन, चिरका में बंद रही सभी दुकानें

पीरटांड़ | जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए सीताराम उपाध्याय के सम्मान में पीरटांड़ के पालगंज समेत मधुबन, चिरकी में लोगों ने शनिवार को दोपहर से संबंधित दुकानों को बंद रखा। वहीं अंतिम संस्कार के लिए तैयारी की जा रही है। आवास के समीप पंडाल बनाया गया तो वहीं स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर श्मशान घाट की सफाई सुबह को की गई। वहीं शहीद के घर जाने वाले रास्तों को दुरुस्त किया गया। इधर स्थानीय लोगों में जहां गम का माहौल था वहीं शहीद सीताराम उपाध्याय उर्फ लाला पर लोग गर्व महसूस कर रहे थे।

शहीद सीताराम की प्रतिमा स्थापित करे सरकार

गिरिडीह | गिरिडीह के सपूत शहीद सीताराम उपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए माले नेता राजेश सिन्हा ने उनकी प|ी और बच्चे को ध्यान में रखते हुए एक करोड़ मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही पालगंज और गिरिडीह में शहीद की विशाल मूर्ति बने ताकि गिरिडीह की जनता हमेशा ऐसे वीर सपूत को याद कर सके और वीरता की गाथा गा सके।

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