कटकई गांव में गुरुवार को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘गोबर-धन’ योजना की शुरुआत की गई। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए देशभर में चयनित 700 गांवों में जिले के गांव कटकई को शामिल किया गया है।
डीआरडीए के परियोजना अधिकारी गोविंदराम शर्मा ने गोबर-धन योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना से एक तरफ स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा तो दूसरी ओर किसानों को रसायनिक खादों की जगह ऑर्गेनिक खाद उपलब्ध होगी। इसके साथ ही अस्वच्छता एवं गंदगी की वजह से होने वाली बिमारियों में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि घर के अंदर लकड़ी और उपले जलाने से जो वायु प्रदूषित होती है उससे छुटकारा मिलेगा एवं एक साफ जलाने के लिए रसोई में स्वच्छ गैस मिलेगी। गांव में युवक युवतियों को रोजगार मिलेगा, घरों में सस्ता ईंधन उपलब्ध होगा।
यह योजना कटकई में स्वयं सहायता समूह के फेडरेशन के माध्यम से चलाई जाएगी। फेडरेशन की सहायता के लिए तकनीकी विशेषज्ञ की सहायता ली जाएगी जिनके मार्गदर्शन में फेडरेशन समुदाय आधारित बायोगैस प्लांट स्थापित करेगा। शर्मा ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस कार्य के लिए 6 लाख से 7.50 लाख रुपए तक की राशि सरकार की तरफ से दी जाएगी। योजना के मुताबिक घरों से पशुओं का गोबर इकट्ठा किया जाएगा। किसानों के खेतों में फसलों के अवशेष इकट्ठे किए जाएंगे एवं रसोईघरों का कचरा इकट्ठा किया जाएगा जिसे गोबर गैस प्लांट में डाला जाएगा। पंचायत अधिकारी करतार सिंह ने पंचायत की तरफ से यह आश्वासन दिया कि गोबरधन योजना को सफल बनाने में पंचायत स्वयं सहायता समूह फेडरेशन का पूरा सहयोग करेगी। फेडरेशन में दो महिलाओं को अच्छे कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।
किसानों को रसायनिक खादों की जगह मिलेगी ऑर्गेनिक खाद
2018 में हुआ था योजना का जिक्र
डीआरडीए के परियोजना अधिकारी गोविंदराम शर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 के बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए गोबरधन योजना का जिक्र किया था। इस योजना के तहत जिले में अटेली खंड के कटकई गांव को लिया गया है।
एनजीओ की रही अहम भूमिका
कटकई गांव के चयन होने के पीछे महिलाओं के 10 सहायता समूह का होना रहा है। 17 मई 2017 को कटकई में स्वयं सहायता समूह का गठन व उसका पंजीकरण हुआ था। गुरुवार को फेडरेशन को बने एक वर्ष पूरा हुआ। इस खुशी में समूहों ने ग्राम पंचायत तथा ग्रामीणों के साथ केक काटकर खुशी मनाई व मंगलगीत गाए।
नारनौल. ग्रामीणों को ‘गोबर-धन’ योजना बारे जानकारी देते गाेविंद राम शर्मा।
अपील | खेतों में अवशेष ना जलाएं, गोबर व अन्य कचरा बायो गैस प्लांट को ही दें : गोबरधन योजना को सफल बनाने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाई जाएगी। ग्राम पंचायत सुनिश्चित करेगी कि कूड़ा-कर्कट व गोबर जगह-जगह ना फेंके। खेतों में अवशेष ना जलाएं और यह सुनिश्चित करें कि यह सारा कचरा बायो गैस प्लांट को ही दें। इसके लिए बाकायदा ग्राम पंचायत एक प्रस्ताव पास करके बायोगैस प्लांट लगाने के लिए भूमि का चयन करेगी। इसके बाद राज्य स्तरीय तकनीकी सलाहकार को स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी। इसके लिए यदि और अधिक धन राशि की जरूरत होगी तो वह मनरेगा या एमपीलैड या वित्त आयोग की प्राप्त राशि से पूर्ति की जाएगी।