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आपसी खींचातानी छोड़, बिजली-पानी की मांग को लेकर एकजुट हुए जिला पार्षद

3 वर्ष पहले
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पिछले ढाई साल के जिला परिषद के कार्यकाल में गुरुवार पहला ऐसा दिन रहा जब बैठक में जिला पार्षदों ने आपस में एक दूसरे की खिंचाई करने या आरोप-प्रत्यारोप लगाने की बजाय एकजुटता दिखाई हो। अब तक विकास राशि के बंटवारे और जिला प्रमुख के कार्यशैली के खिलाफ आवाज उठाने वाले पार्षद डीआरडीए के सभागार में हुई बैठक में खुलकर तो बोले, किंतु उनका मुद्दा खिलाफत का नहीं, इलाके के विकास, खासकर आमजन की समस्या के समाधान के प्रति अपनी चिंता जताने वाला रहा। वह मुद्दा था-इलाके में बिजली पानी की कमी, पशुओं के लिए जोहड़ भरवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास का। पार्षदों का कहना था कि अगर वे पानी ही नहीं ला पाये तो फिर उनके जनप्रतिनिधि होने का क्या लाभ।

जिला परिषद प्रमुख राजेश देवी की अध्यक्षता में करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में इन्द्रपाल सुरेश रावत, विनोद यादव भील, प्रदीप मालडा, रेणु मुलोदी, सतपाल, अश्वनी कुमार, सुनीता वर्मा समेत अनेक पार्षदों ने इलाके में बिजली पानी के मसले पर सरकार द्वारा की जा रही उपेक्षा पर चिंता जताई। उन्होंने इस मामले में विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और सुस्त कार्यशैली पर भी नाराजगी जाहिर की। इस मुद्दे की शुरूआत इन्द्रपाल ने की। उन्होंने कहा कि 2 मई के बाद आए अंधड़ के 15 दिन बीत गए है। बाछौद, मिर्जापुर, सराय, सुरानी, खतरीपुर, कुंजपुरा, भीलवाड़ा, गुवानी समेत अनेक गांवों में अब तक बिजली सप्लाई बहाल नहीं हुई है। यहां पानी की पूर्ति भी नहीं हो पा रही है। सुरेश रावत का कहना था कि जोहड़ खाली पड़े है। पशुओं को पानी नहीं मिल रहा है। विनोद भील का कहना था कि गांवों में दो घंटे बिजली आती है। सारा सिस्टम नहरी पानी पर आधारित है। नए बोर नहीं हो रहे। उनका कहना था कि अगर लाईट नहीं आई तो लोग पलायन तक कर जाएंगे, तब ऐसी बैठकों का क्या लाभ। हालांकि वहां मौजूद बिजली निगम के महेंद्रगढ़ क्षेत्र के एक्सईएन का कहना था कि उस अंधड़ में 1800 पोल टूटे थे। अकेले महेंद्रगढ़ में ही 600 खंभे गिरे। इतने बड़े नुकसान को और इतनी मात्रा में गिरे खंभों को मैनेज करने में समय तो लगता है। उनकी इस दलील पर जिला प्रमुख राजेश देवी ने इन पार्षदों का पक्ष लिया। उनका कहना था कि गांवों में बिजली नहीं आ रही। आखिर कितने दिन सब्र किया जाए। बिना बिजली बच्चों की पढाई कैसे हो। उन्होंने अधिकारी से जवाब मांगा कि जब उनके दफ्तरों में बिजली आ सकती है तो गांवों और ढाणियों में अब तक क्यों नहीं आ रही।

पार्षद प्रदीप मालडा ने कहा कि पानी की मांग को लेकर अनेक पार्टियां धरना-प्रदर्शन कर रही है, पर हम इस सदन के माध्यम से सही प्रकार से कोई प्रयास कर रहे। उन्होंने सबसे पूछा कि जिला परिषद के पास अगर दस करोड़ का बजट आता है तो इसका अधिकांश हिस्सा सोलर प्लांट लगाने और पानी के दुरुपयोग को रोकने पर खर्च क्यों नहीं किया जाना चाहिए। सुनीता वर्मा का तर्क था कि जब हम जिला स्तर पर इस सदन के माध्यम से पानी की समस्या का समाधान नहीं कर सकते तो फिर हमारे पास पावर ही क्या है। नव निर्वाचित पार्षद रेणु मुलोदी ने अपनी पहली बैठक में अकबरपुर, सिरोही बहाली, मेघोत हाला समेत अनेक गांवों में जोहड़ खाली होने का मसला उठाया। पानी की कमी के बारे में जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ गोपाल सिंह ने बताया कि जिले में अधिकांश सिस्टम कैनाल बेस हैं। पहले 15 दिन में नहर आती थी, अब 24 दिन में आ रही है, इसलिए ज्यादा किल्लत बढ़ी है। अगर यह सिस्टम दोबारा 15 दिन का हो जाये तो समस्या का जल्दी समाधान निकल जाएगा।

पार्षद सुरेश रावत के नांगल चौधरी क्षेत्र के सभी गांवों में जोहड़ खाली रहने और उन्हें तत्काल भरवाए जाने की मांग पर नहर विभाग के अधिकारी ने बताया कि 21 गांवों में इस काम के लिए टेंडर के लिए अभी फाइल चंडीगढ़ भेजी गई है। जल्दी ही इसे मंजूरी मिलने की संभावना है।

नारनौल. बैठक में अपनी बात रखते पार्षद ।

पार्षदों का कहना था कि अगर वे पानी ही नहीं ला पाये तो फिर उनके जनप्रतिनिधि होने का क्या लाभ

इस साल परिषद को Rs. 7 करोड़ 90 लाख मिलने की उम्मीद

इस बैठक में जिला परिषद को इस साल 7 करोड़ 90 लाख रुपए मिलने की उम्मीद जताई गई तथा उसमें से 6 करोड़ 65 लाख रुपए खर्च करने के अनुमानित बजट को भी स्वीकृति दी गई। इसके अलावा अटेली व कनीना पंचायत समिति का अनुमानित बजट भी पास किया गया। बैठक में परिषद के 20 सदस्यों में से 5 सदस्य अनुपस्थित रहे। उनमें वार्ड 2 से राकेश, वार्ड 3 से रितु, वार्ड 8 से कुलदीप, 14 से राजेश मांदी, 19 से कमला देवी शामिल थे।

पंचायती खेलों के लिए किट पहुंची : डिप्टी सीईओ दीपक यादव ने पार्षदों से कहा कि ग्रामीण पंचायती खेलों के लिए किट आ गई है जो पार्षद इसे वितरित करना चाहते है वे गांवों के नाम बता सकते है। उन्होंने गांवों में बनी व्यायामशाला में योग प्रशिक्षक लगने से पहले अनेक गतिविधियां शुरू करने का सुझाव दिया। बीपीएल के मुद्दे पर डिप्टी सीईओ ने बताया कि इसमें जून के बाद सर्वे शुरू करवाया जायेगा।

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