जिला बागवानी विभाग ने विश्व मधुमक्खी दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को गांव मुंडायन में शिविर लगा कर किसानों को मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक विधि बारे विस्तार से बताया। इस एक दिवसीय शिविर में 55 किसानों ने भाग लेकर मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक विधि बारे जानकारी हासिल की।
इस अवसर पर जिला उद्यान अधिकारी डाॅ. मनदीप यादव ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक अच्छा व्यवसाय है। जिन किसानों के पास खेती की जमीन कम है अथवा नहीं है। ऐसे किसान इस व्यवसाय को अपना कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि किसान सही प्रशिक्षण लेकर मधुमक्खी पालन शुरू करें तो यह लाभकारी व्यवसाय है। सरकार प्रदेश में बागवानी को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में यहां के किसान मधुमक्खी पालन अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
शहद में होते हैं 180 तत्व
उद्यान अधिकारी ने बताया कि शहद में 180 प्रकार के तत्व पाए जाते हैं। इनमें 18 तरह के एसिड, 12 तरह के मिनरल, 12 तरह के अमीनो एसिड, 5 तरह के एन्जांइस, 18 तरह के बॉयो प्लोवर नाईड, 26 तरह के एरोमा कम्पाडड, 17 तरह के ट्रैस एलीमेट, 6 तरह के विटामिन व 8 तरह के लिपिड होते है। इस प्रकार शहर सर्वगुण संपन्न होता है। इसी कारण आज मार्केट में शहद की बहुत ज्यादा डिमांड है। उन्होंने बताया कि शहद कई तरह का होता है तथा इसका स्वाद भी कई तरह का होता है। शहद उन्हीं क्षेत्रों से एकत्रित किया जाता है जहां न तो रासायनिक उर्वरक का प्रयोग होता है और न ही खरपतवारनाशक दवा का प्रयोग होता है। विकसित देशों में जमे हुए शहद को ही उपभोक्ताओं द्वारा खरीदा जाता है।
उन्होंने विभाग द्वारा चलाई जा रही सभी स्कीमों जैसे कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अनुसूचित जाति उपयोजना भावांतर भरपाई योजना व राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत किसानों के लिए शुरू की गई स्कीमों की जानकारी दी। गांव के प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश शास्त्री ने गांव में आकर विश्व मधुमक्खी दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विभाग का धन्यवाद किया। इस अवसर पर बागवानी विभाग के कर्मचारी राजकुमार, रामपाल व विक्रम मौजूद थे।