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हिंदी काव्य में राम के कई रूपों की है झलक

3 वर्ष पहले
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हिंदी रामकाव्य को परंपरागत रूप से जो रामकथा मिली उस पर वाल्मीकि रचित रामायण का सर्वाधिक प्रभाव है। लेकिन हिंदी कवियों ने उसमें नवीनता का समावेश भी किया है। यह कहना है लखनऊ से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी का। स्थानीय हुडा सेक्टर-1 पार्ट 2 मनुमुक्त भवन में गत दिवस देर शाम हिंदी काव्य में राम का स्वरूप विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राम भले ही एक है लेकिन हिंदी काव्य में उनके अनेक रूपों की झलक मिलती है। लगभग डेढ़ दर्जन पुस्तकों के विद्वान लेखक डॉ. द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि तुलसी कृत रामचरितमानस में राम मर्यादा पुरुषोत्तम है मैथिलीशरण गुप्त साकेत में आदर्श महामानव है तो रामचंद्र शर्मा रचित रामराज्य में प्रजा हितैषी राजा। डॉ. जितेंद्र भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना गीत के बाद डॉ. पंकज गौड़ के कुशल संचालन में संपन्न हुई इस 18वीं संगोष्ठी में चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास मानव ने कहा कि युग परिवेश के अनुसार राम का स्वरूप भी बदलता रहा है। पूर्व प्राचार्य डॉ. शिवताज सिंह ने राम के विभिन्न रूपों के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि हिंदी काव्य में वर्णित राम का हर रूप अनूठा है। इस अवसर पर डॉ. द्विवेदी को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के दृष्टिगत डॉ. मनुमुक्त मानव स्मृति सम्मान भी प्रदान किया गया।

नारनौल. मनुमुक्त भवन में आयोजित गाेष्ठी में रामकाव्य पर विचार प्रकट करते वक्ता रामनिवास मानव ।

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