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मित्रता के सामने किसी भी परिस्थिति समय व स्थान का कोई महत्व नहीं

3 वर्ष पहले
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नारनौल | मोहल्ला दयानगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा वाचक आचार्य मोरध्वज शुक्ला ने भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता पर बोलते हुए कहा कि श्रीकृष्ण व सुदामा बाल सखा थे। भगवान कृष्ण ने ना कभी स्वयं और ना ही किसी अन्य के माध्यम से सुदामा की दरिद्रता महसूस होने दी। सब सखा आपस में इस कदर घुले मिले हुए थे कि किसी को छोटे बड़े अमीर गरीब आदि का कोई आभास नहीं था। सुदामा जब दरिद्रता का दुख लेकर भगवान श्री कृष्ण के पास पहुंचे तो उन्होंने सुदामा के चरण धोकर उनका ऐसा सत्कार किया कि सुदामा को अपनी दरिद्रता और कृष्ण के ओहदे का आभास तक नहीं हुआ। कृष्ण ने अपने सखा की मदद कर मित्रता की परिभाषा का वृहद संदेश दिया कि मित्रता के सामने किसी भी परिस्थिति, समय व स्थान का कोई महत्व नहीं है। इस अवसर पर महाबीर सिंह, परमिंद्र, माडूराम, प्रवीण यादव, सोनू, विकास, अशोक, सुनील उपस्थित थे।

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