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माह रमजान में खुदा की इबादत का दौर शुरू

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता. नसरुल्लागंज

बुधवार शाम से मुस्लिम समाज का सबसे पाक माह रमजान का आगाज हो गया और गुरुवार से मुसलमानों ने पहला रोजा रखा। इस्लाम के मुताबिक रमजान माह की इबादत अल्लाह के नजदीक सबसे ज्यादा महबूब है। क्योंकि रमजान में अल्लाह नेकियों के भाव में इजाफा कर देता है और एक नेकी करने पर 70 नेकियों का सवाब (पुण्य) अता करता है।

इस माह को खास बनाने में माह भर पढ़ी जाने वाली तरावीह की विशेष नमाज और रोजा दोनों अहम हैं। मुकम्मल कुरान की तिलावत (पड़ा जाना) होती है। तरावीह की विशेष नमाज की वजह से खुदा की इबादत में किए जाने वाले सजदों की संख्या भी रमजान में प्रतिदिन 96 से बढ़कर 136 सजदे हो जाते हैं। नामाजी सत्तार खान के मुताबिक जो शख्स जितने ज्यादा सजदे जिस पाक जमीं पर करता है, उस जमीं से उसकी उतनी ही मोहब्बत बढ़ जाती है और वह जमीन भी सजदा करने वाले के लिए अल्लाह से दुआएं करती है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में कहा है कि जिस मुल्क में रहो उस मुल्क से मोहब्बत करों। हिंदुस्तान के मुसलमान अपने मुल्क से बहुत मुहब्बत करते है। हर नमाज के दौरान जिस जमीं के लिए मोहब्बत बढ़ती जाती है। रमजान में पढ़ी जाने वाली सभी नमाजों में हर रोज 136 सजदे किए जाते हैं। इसके अलावा व्यक्तिगत नमाज के पढ़े जाने पर सजदे बढ़ जाते हैं। बंदे रात की इबादत में सबसे ज्यादा सजदे करते हैं।

विशेष इबादत होती है

पाक रमजान के 20 रोजों के बाद शेष रातों में शब ए कद्र हो सकती है।

शब- ए-कद्र की रात लोग रातभर इबादत करते हैं। इस रात लोग रातभर इबादत करते है। इस रात में ही हजारों सजदे हो जाते है। इस रात में इबादत करने पर हजार महीनों तक इबादत करने का सवाब अल्लाह अता फरमाता है।

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