श्रीलालन प्यारे को शृंगार धराकर, राग और भोग सेवा के लाड-लड़ाए
नाथद्वारा| वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया बुधवार को श्रीजी प्रभु की हवेली में अक्षय तृतीया का पर्व का धूमधाम व परंपरानुसार मनाया गया। श्रीजी प्रभु के संग श्रीलालन प्यारे को अनूठा शृंगार अंगीकार कराकर राग व भोग सेवा के लाड़-लड़ाए गए। सुबह बाल स्वरूपों को अभ्यंग स्नान कराकर मुखिया बावा ने श्रीचरणों में मोती के तोड़ा धराए। प्रभु के श्रीअंग पर चंदन की कोर का पिछोड़ा अंगीकार कराया गया। श्रीमस्तक पर कुल्हें, तीन मोरपंख का जोड़ व शीषफूल सुशोभित किया। श्रीकर्ण में कर्णफूल तथा श्रीअंग पर मोती के आभरण, छेड़ा का श्रृंगार, चंदनिया ठाढ़े वस्त्र धराकर शृंगार सुशोभित किया। कंदरा खंड में मलमल की रूपहरी किनारी वाली धवल पिछवाई सुशोभित की गई। राजभोग झांकी में मुखिया बावा ने बाल स्वरूपों की आरती उतारी वहीं कीर्तनकारों ने विविध राग में पदों का गान किया। अक्षय तृतीया के उपलक्ष्य में श्रीजी प्रभु के संग श्रीलालन प्यारे को श्रीअंग पर चंदन की सेवा अंगीकार कराई गई। बुधवार को दो राजभोग के दर्शन हुए। पहले राजभोग में प्रभु को चंदन गोली धराई गई, वहीं दूसरे राजभोग में नित आरती हुई। अक्षय तृतीया से श्रीजी प्रभु की हवेली में शीतल भाव की सेवा शुरू हो जाती है। बुधवार को राजभोग झांकी में जहां श्रीजी प्रभु को श्रीअंग पर चंदन की सेवा अंगीकार कराई गई।