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साहिबान की मंडली में विराजे श्रीनाथजी, प्रभु द्वारिकाधीश को सोने के हिंडोलने में झुलाया

3 वर्ष पहले
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नाथद्वारा/राजसमंद| पुष्टिमार्गीय मत की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर, दूसरी पीठ विट्ठलनाथजी, नवनीतप्रियाजी और कांकरोली में तीसरी पीठ के प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर में अधिकमास के उत्सव-मनोरथ बुधवार को शुरू हुए। दर्शनों में बाहर के श्रद्धालुओं की कतार रही। मंदिरों में अधिकमास के तहत वे सारे उत्सव-मनोरथ होंगे, जो इनमें सालभर होते हैं।

पहले दिन श्रीनाथजी प्रभु को अनूठा शृंगार अंगीकार करवाया। प्रभु को राजभोग की झांकी में साहिबान की मंडली में विराजित किया। शाम को आरती झांकी में सांझी का अलौकिक मनोरथ हुआ। नवनीतप्रियाजी को राजभोग की झांकी में साहिबान की मंडली में विराजित किया और यहां भी शाम को आरती झांकी में सांझी का मनोरथ हुआ। विट्ठलनाथजी को राजभोग की झांकी में फूल-पत्ती के पलने में, आरती व शयन झांकी में साज के बंगले में विराजित किया। मुखिया बावा ने बाल स्वरूपों को अनूठा शृंगार धराकर राग, भोग के लाड लड़ाए। कांकरोली के प्रभु द्वारिकाधीश प्रभु को राजभोग के दर्शनों में गर्मी के भाव से गुलाब के फूल की मंडली में विराजित किया। शयन के दर्शनों में प्रभु श्री को सोने के हिंडोलने में विराजित कर दर्शन करवाए। बाहर से कई वैष्णव दर्शन करने के लिए पहुंचे।

प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर।

श्रीनाथजी प्रभु को केसरी धोती, पटका अंगीकार करवाया

शृंगार की झांकी में मुखिया बावा ने श्रीनाथजी प्रभु के श्रीचरणों में मोती के तोड़ा धराए। श्रीअंग पर हल्की केसरी धोती व पटका अंगीकार करवाया। श्रीमस्तक पर कुल्हे, सफेद मोरपंख चंद्रिका व शीशफूल सुशोभित किया। श्रीकर्ण में मोती के मत्स्याकृत कुंडल धराए। प्रभु को श्रीअंग पर मोती के आभरण धराकर कंदराखंड में वस्त्रानुसार पिछवाई धराई गई। मणि कोटा में फूल-पत्ती की सांझी बनाई गई। मुखिया बावा ने बालस्वरूपों की आरती उतारी। कीर्तनकारों ने विविध पदों में राग का गान किया। विट्ठलनाथजी मंदिर में युगलस्वरूप को बालभाव से फूल-पत्ती का पलना, बालभाव से शृंगार में टोपी, झुगली धरा कर झुलाया तथा गर्मी का शृंगार अंगीकार करवाया। गर्मी को लेकर फव्वारे की सेवा धराई। इस दौरान कीर्तनकारों ने बाहर देखो तो बारह बरस को, घर देखो झूले पलना में... सहित अन्य पदों का गान किया। शयन झांकी में युगलस्वरूप को साज के बंगले में विराजित कर मुखिया बावा ने प्रभु की आरती उतारी। सेवा अंगीकार करवाई।

द्वारिकाधीश प्रभु को मोती के आभरण धराए

कांकरोली में प्रभु द्वारिकाधीश को श्रीमस्तक पर मोती के खूंप, चंदनी के विभिन्न छाप के धोती उपरना, मोती के आभरण धराए। राजभोग के दर्शनों में प्रभु को गर्मी के भाव से गुलाब के फूल की मंडली में विराजित किया। दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की कतार रही। कीर्तनकारों ने अधिकमास के पदों का गान किया। शयन के दर्शनों में प्रभु श्री को सोने के हिंडोलने में विराजित कर दर्शन करवाए।

मंदिरों में आज के मनोरथ

द्वारिकाधीश मंदिर कांकरोली : कांच के बंगले में विराजेंगे ठाकुरजी

गुरुवार को ठाकुरजी को सुबह साढ़े ग्यारह बजे राजभोग के दर्शन में कांच के बंगले का मनोरथ धराया जाएगा। शयन में प्रभु को विशेष बंगले में विराजित किया जाएगा।

श्रीनाथजी मंदिर में आज राजभोग में रथयात्रा मनोरथ और आरती झांकी में चंदन का हिंडोलना होगा

नाथद्वारा| श्रीनाथद्वारा में पुरुषोत्तम मास के दूसरे दिन गुरुवार को प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर और द्वितीयपीठ विठ्ठलनाथजी मंदिर और श्रीनवनीत प्रियाजी में अनूठे मनोरथ होंगे। मंदिर से जारी सूची के अनुसार श्रीजी मंदिर में राजभोग झांकी में रथयात्रा मनोरथ और आरती झांकी में चंदन का हिंडोलना होगा। श्रीजी प्रभु के सम्मुख चंदन के हिंडोलना में मदन मोहनजी को बिराजित कर लाड-लड़ाए जाएंगे। द्वितीय पीठ विठ्ठलनाथजी को राजभोग की झांकी में चांदी का पलना और आरती झांकी में चंदन की बंगली में बिराजित किया जाएगा। श्रीनवनीत प्रियाजी को राजभोग की झांकी में गुलाब की मंडली में बिराजित किया जाएगा। शाम को आरती झांकी में चंदन का हिंडोलना में बिराजित कर राग भोग सेवा के लाड-लड़ाए जाएंगे।

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