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जंगल में लगे तेंदू पत्तों से हर माह एक परिवार की कमाई 45 हजार रुपए

3 वर्ष पहले
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आज कल ग्रामीण व पहाड़ी इलाकों में कई लोग रोजगार नहीं होने के कई बहाने बनाते हैं और काम की तलाश में बांसवाड़ा शहर या दूसरे अन्य शहर में भटकते हैं।

ठीक उसके विपरीत बांसवाड़ा जिले में फैला लाखों हेक्टेयर जंगल और इनमें लग रहे तेंदू के पेड़ आय का साधन बने हुए हैं। बांसवाड़ा जिले में अरावली पर्वतमालाओं के आसपास के रहने वाले परिवार मात्र 1 से डेढ़ माह में प्रतिदिन दो घंटों की मेहनत से रोजाना एक हजार से डेढ़ हजार रुपए प्रतिदिन यानी एक माह में 40 से 45 हजार रुपए कमा लेते हैं। तेंदू का पत्ता जिसे जंगल के आसपास के लोग तोड़कर जिस जगह दुकान लगाई जाती है। वहां पत्तों के गट्ठर बांध कर लेते हैं व ठेकेदार को 30 से 35 पत्तों के बंडल बनाकर देते हैं। उसके बदले 90 पैसा प्रति बंडल दिया जाता है। रोजाना एक परिवार जिसमें कम से कम 3 से 4 लोग मिलकर काम करते हैं, रोजाना 1200 से 1500 रुपए आसानी से कमाते हैं। जिले में 16 जगहों पर तेंदू पत्तों के खरीदने की दुकानें लगी हुई हैं। जिसमें सिर्फ गणाऊ में अब तक 7 लाख की आमदनी लोगों के हो चुकी है। साथ ही अभी आगे 4 लाख की आय और होने की उम्मीद है। तेंदू के पेड़ पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा बांसवाड़ा में पाए गए हैं। यहां के लोग इसे देसी भाषा में टिमरू भी कहते हैं। इसके पत्ते के साथ इसका फल भी बड़ा स्वादिष्ट होता है। यह फल चीकू के समान दिखाई देता है। मार्च माह में कंपनी के लोग इन तेंदू के पेड़ों के टहनियों की कलम करवाते हैं, जिससे पत्ते बड़े आकार के हो, कलम करने के 40 से 45 दिनों में नए पत्ते आ जाते हैं। इस काम के भी स्थानीय लोगों को प्रति व्यक्ति 100 रुपए मेहनताना दिया जाता है। कालूराम मईडा गणाऊ ने बताया कि इस काम की जिम्मेदारी लेता है उसे मासिक मेहनताना भी देते हैं। पत्ते सूखने के बाद पलटी करने के पैसे अलग से दिए जाते हैं। यानी अप्रैल माह से मई माह तक के दो माह में इस इलाके के सैकड़ों लोग रोजगार करते हैं। रोजाना जो लोग पत्ते लेकर आते हैं, उन्हें तुरंत ही नकद भुगतान कर दिया जाता है।

जिले में इन जगहों पर लगी दुकानें

नावलापाड़ा, नाल, गणाऊ, गरनावट, झेर, केसरपुरा, सादड़ी, बनाला, गागरी, केवडिया, मंगलिया दईड़ा

सालाना आय : बांसवाड़ा के जंगल में एक साल में 40 लाख की राशि की औसत आमदनी तेंदू पत्तों से होती है।

खेती की सीजन नहीं, इधर समाज में शादी और नोतरा जिसमें तेंदू की पत्तों से होने वाली नकद आय से आदिवासी समाज के लोगों को बहुत बड़ी सहायता इस समय में मिल जाती है।

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