आर्मी को जाने स्लोगन के तहत बच्चों को आर्मी की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी देने के लिए किरपाल सागर अकादमी में आर्मी के हथियारों की प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में जिले के कई स्कूलों के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। बच्चों ने हाथों में आर्मी के हथियार उठाए और हर हथियार की मारक क्षमता के बारे में जाना।
कैंप में डा. आसा नंद स्कूल, केसी पब्लिक स्कूल, राहों के आसपास के कई स्कूलों के बच्चों ने हिस्सा लिया और आर्मी द्वारा प्रयोग किए जाते हथियारों व अन्य सामग्री की क्षमता के बारे में सवाल किए। बच्चों के सवालों के जबाव आर्मी के जवानों ने बेहद गहराई के साथ दिया। बच्चों ने हाथों में हथियार पकड़ खूब फोटो खिंचवाईं। आर्मी का लाइफ स्टाइल कैसा है। आर्मी अधिकारियों ने बच्चों को आर्मी में युवाओं के लिए विकल्प के बारे में भी बताया। इस दौरान बच्चों को 20 मिनट की प्रोत्साहित फिल्म भी दिखाई। मेजर रवि कांत ने बताया कि इससे पहले आम तौर पर बच्चे आर्मी के हथियारों को स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्रत दिवस या किसी खास दिन पर ही आर्मी के बारे में जान पाते थे लेकिन आर्मी द्वारा अब बच्चों को रुटीन में इस तरह की जानकारी देने के लिए आर्मी को जाने नाम का एक अभियान चलाया गया है, जिसके तहत बच्चों में देश भक्ति पैदा करने, उन्हें आर्मी में जाने के विकल्प के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
प्रदर्शनी में दिखाए सेना के यह हथियार
सेना की ओर से लगाई जाने वाली प्रदर्शनी में आर्मी की ओर से प्रयोग किए जाने वाले हथियार दिखाए गए। एके-56 से एक मिनट में कितनी गोलियां निकलती हैं। किस बंदूक से निकलने वाली गोली कितने मीटर दूरी पर दुश्मन को ढेर करती है। इस तरह के सवाल हर बच्चे के मुंह से निकल रहा था। बच्चों ने आर्मी टैंक (जिसमें पानी में तैरने वाले टैंक, हथियार फेंकने वाले टैंक), राकेट लांचर, मीडियम मशीन गन, आटोमैटिक ग्रेनेड लांचर, लाइट मशीन गन, कई किलोमीटर तक देखने वाली दूरबीन (लूरस) के अलावा आर्मी बैंड की कार्यप्रणाली के बारे जानकारी ली।
स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स ने भी जानी आर्मी हथियारों की रेंज
हथियारों की प्रदर्शनी देखने के लिए आए कई स्कूलों के बच्चों ने पानी में तैरने वाले टैंक, हथियार फेंकने वाले टैंक, राकेट लांचर और मीडियम मशीनगन देखी।