पिता को जरूरतमंदाें का फ्री इलाज करते देखा तो खुद भी सेवा करने की ठानी
पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसायटी की संचालिका डाॅ. इंद्रजीत कौर ने छोटी उम्र में अपने पिता डाॅ. हरबंस सिंह को जरूरतमंद मरीजों की मुफ्त सेवा करते हुए देखा, तो उनके मन में भी सेवा का भाव उत्पन्न हो गया।
नवांशहर के ब्लड डोनर्स कौंसिल पहुंची डाॅ. इंद्रजीत कौर ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत दौरान अपने जीवन की बातें सांझा कीं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वह वाहेगुरु की भक्ति में लीन रहती थी। क्योंकि उनके पिता हरबंस सिंह पेशे से डॉक्टर थे। वे अक्सर गरीब मरीजों का निशुल्क करते थे। उन्हें देखकर ही उनके मन में सेवा भाव उत्पन्न होने लगा। सरकारी स्कूल से साइंस में अच्छे नंबर प्राप्त किए, उसके बाद मेडिकल काॅलेज संगरुर में दाखिला लिया। इस दौरान वे गरीब बच्चों को पढ़ाई भी करवाती थी। जिन्होंने स्कूल जाकर अच्छे नंबर लिए। पढ़ाई खत्म करने के बाद बरनाला के सिविल अस्पताल में डॉक्टर की नौकरी मिल गई। नौकरी दौरान उन्होंने मरीजों की दिल से सेवा की। कई बार अपनी पगार से पैसे खर्च मरीजों का इलाज करवाने में मन को शांति मिलती थी।
बीडीसी में विजिटर बुक में हस्ताक्षर करतीं डाॅ. इंद्रजीत कौर।
पिता की मौत के बाद भगतपूर्ण सिंह को माना पिता
डॉ. इंद्रजीत कौर के पिता हरबंस सिंह की मौत के उपरांत उनका साथ भगतपूर्ण सिंह ने पिता के रुप में दिया। वर्ष 1988 में बीबी इंद्रजीत कौर को भगतपूर्ण सिंह ने पिंगलवाड़ा संस्था का उपाध्यक्ष बना दिया। इस दौरान बीबी इंद्रजीत कौर ने समाज के असहाय लोगों की सेवा जी जान से की। वर्ष 1992 में भगतपूर्ण की मौत उपरांत बाद डाॅ. इंद्रजीत कौर को अध्यक्ष चुन लिया गया।
पिंगलवाड़ा में इस समय हैं 1700 मरीजों का प्रबंध
बेसहारों के रहने के लिए उनकी संस्था के पास 1700 बेड हैं। उनके लिए खाने-पीने विशेष प्रबंध किए गए है। इसके अलावा हर प्रकार की डॉक्टर की टीम भी रखी गई है जो बीमार होने पर इनका इलाज करती है। इसके अलावा जरूरतमंदों की सहायता भी की जाती है।
पद्म भूषण समेत अब तक मिल चुके हैं 9 अवाॅर्ड
अब तक डाॅ. इंद्रजीत कौर को 9 अवाॅर्ड मिल चुके है। इनमें माई भागो अवार्ड, (स्टेट अवार्ड, पंजाब-1998), बाल सहयोग अवाॅर्ड (गर्वट. ऑफ दिल्ली 2001), पंज्ज पानी अॅवार्ड (जालंधर दूरदर्शन 2005), वाईबरंट इंडिया अॅवार्ड (डेवलपर्स इंडिया, चेन्नई 2006), भगतपूर्ण सिंह अॅवार्ड (पंजाबी हेरिटेज आर्गेनाईजेशन, यूएसए), स्वामी रामा हयूमीनीटेरियन अवाॅर्ड (2007), पद्म भूषण अवाॅर्ड (2008) शामिल हैं।
सोसायटी से जुड़े बच्चों ने विदेश में डंका बजाया
पिछले साल यानी 2017 में वयाना में हुई पैरा ओलंपिक में उनके तीन स्पेशल बच्चों ने हिस्सा लिया। कड़ी मेहनत के बाद इनमें से दो बच्चों ने गोल्ड मेडल जीत लिया। इनके नाम पूनम व राजू था।