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पंजाबियों ने शारीरिक मेहनत छोड़ी, हो रहे हार्टअटैक के शिकार : डाॅ. इंद्रजीत
ब्लड डोनर कौंसल (बीडीसी) के 26वीं सालगिरह के उपलक्ष्य पर पिंगलवाड़ा संस्था अमृतसर की संचालिका डॉ. बीबी इंद्रजीत कौर मुख्यातिथि के तौर पर पहुंचीं। इस मौके पर डॉ. इंद्रजीत कौर ने कहा कि पंजाबियों ने शारीरिक मेहनत करना बिल्कुल ही छोड़ दिया है। खासकर वे जो गांव में रहने वाले हैं इसलिए वे ब्लड प्रेशर व हार्टअटैक जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग बाजार का खाना ज्यादा खाते हैं, जोकि हमारी सेहत के लिए काफी हानिकारक है।
उसमें अधिकतर मसाले डाले जाते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि वे हमेशा उन लोगों को पसंद करती है जो लोग मेहनत करते हैं। मेहनत करने वाले इंसान का भगवान भी हमेशा साथ देता है। जिंदगी में उन्नति भी वहीं इंसान करता है। इसके उपरांत बीडीसी में अखंड पाठ के भोग भी डाले गए। अंत में बीडीसी द्वारा डा. बीबी इंद्रजीत कौर को सम्मानित किया। इस मौके पर जेएस गिद्दा, र| जैन, पुष्पराज कालिया, परवेश कुमार, डा. अजय बग्गा, राजिंद्र कौर, ओपी शर्मा, जोगा सिंह आदि मौजूद रहे।
बीडीसी टीम के साथ पिंगलवाड़ा संस्था की संचालिका बीबी इंद्रजीत कौर। -भास्कर
धार्मिक स्थलों में पाठशालाएं खोली जाएं : बीबी इंद्रजीत कौर
बीबी इंद्रजीत कौर ने बताया कि किसी समय धार्मिक स्थलों में पाठशालाएं खोली होती थी। ऐसे में हर बच्चा वहां पर पढ़नेे के लिए आ जाता था। अब वहां पर बंद कर दी गई है। मेरे ख्याल से धार्मिक स्थलों यानी गुरुद्वारों व मंदिरों में पाठशालाएं खोल देनी चाहिए, ताकि हर किसी का बच्चा पढ़ लिखकर साक्षर हो जाए।
भगत पूर्ण दिवस पर लोगों को करेंगे अवेयर
भगत पूर्ण दिवस पर लोगों को अवेयर किया जाएगा। ये कहना था भगत पूर्ण सिंह पिंगलवाड़ा संस्था की संचालिका बीबी इंद्रजीत कौर का। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई से लेकर अगस्त के अंत तक यह कीरती कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें हाथ से बनाई गई वस्तुएं उक्त कार्यक्रम के केंद्र बिंदु होंगी। वहीं, उन्होंने लोगों से बाजार के डिस्पोजल पदार्थों का प्रयोग न करने की बात पर जोर दिया। उनका कहना है कि ये सेहत के लिए हानिकारक साबित होता है।
पंजाबी बोली का प्रयोग लगातार कम हो रहा
बीबी इंद्रजीत कौर ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत दौरान कहा कि पंजाब की मां बोली पंजाबी का प्रयोग बहुत कम हो रहा है, खासकर पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा बच्चों की जुबां से बैन की जा रही है। उन्हें हिंदी व अंग्रेजी बोलने पर मजबूर किया जा रहा है। पाकिस्तान में आज भी अधिकतर हिस्सों में पंजाबी बोली जाती है। इसके लिए हम सब को इकट्ठा होकर बीड़ा उठना होगा, फिर जाकर बात बनेगी।