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टोका मशीन से हाथ कटने पर लेना पड़ा दो यूनिट रक्त, अब 22 साल से लगातार कर रहे रक्तदान

3 वर्ष पहले
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पच्चीस साल पहले टोका मशीन (पशुओं का चारा काटने वाली मशीन) में अपना दाया हाथ गंवाने वाले गांव रमरायपुर निवासी दिलावर सिंह रक्तदानियों के लिए मिसाल बन गए हैं। सन 1993 में उनका हाथ कटा, तो उन्हें दो यूनिट रक्त की जरूरत पड़ी। ब्लड ग्रुप पता किया, तो नेगेटिव ग्रुप निकला। नवांशहर ब्लड डोनर्स कौंसिल (बीडीसी) से संपर्क किया, तो वहां से दो यूनिट रक्त मिल गया। दिलावर सिंह कहते हैं कि वे कई दिन अस्पताल में रहे तथा फिर घर पर रहे।

ठीक होने के दो अढ़ाई साल बाद दो यूनिट रक्त के लिए बीडीसी का धन्यवाद करने के लिए बीडीसी नवांशहर पहुंचे, तो उन्हें ब्लड ग्रुप्स के बारे में पता चला, कि नेगेटिव ग्रुप के लोग बहुत कम होते हैं तथा उनके लिए रक्त की भी हमेशा कमी बनी रहती है। बस उन्होंने उसी समय फैसला कर लिया कि जब तक हो सकेगा नियमित रूप से ही नहीं, बल्कि अधिक से अधिक बार रक्तदान करूंगा। लगातार रक्तदान का ये सिलसिला अब 22 साल से जारी है। यूं तो इससे पहले भी उन्होंने एक बार लुधियाना में उन्होंने रक्तदान किया था, लेकिन तब उन्हें नेगेटिव ग्रुप के महत्व के बारे में नहीं बताया गया था। बता दें कि एक व्यक्ति हर तीन महीने में एक बार तथा साल में चार बार रक्तदान कर सकता है तथा इस तरह वे पिछले 22 सालों से लगातार रक्तदान कर रहे हैं तथा अब तक वे 86 बार रक्तदान कर चुके हैं।

दिलावर सिंह कहते हैं कि वे 54 साल के हैं तथा कम से कम 60 साल तक जरूर रक्तदान करेंगे, क्योंकि रक्तदान कर उनके मन को सुकून पहुंचता है। इसके अलावा वे गांव में युवाओं को नशों से बचाने के लिए भी काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि युवाओं को नशों को छोड़ रक्तदान की ओर जोड़ना चाहिए।

बीडीसी में एक कैंप के दौरान रक्तदान करते दिलावर सिंह।

86 यूनिट कर चुके हैं रक्तदान

बीडीसी से जुड़े एवं समाज सेवक जेएस गिद्दा ने बताया कि कई बार तो दिलावर सिंह तीन महीने से पहले ही रक्तदान के लिए पहुंच जाते हैं तथा फिर उन्हें रिकार्ड चेक करके बताना पड़ता है कि अभी 90 दिन नहीं हुए हैं तथा दो-चार दिन बाद आना। दिलावर सिंह ने बताया कि बीडीसी में उन दिनों स्लोह के कश्मीर सिंह काम करते थे तथा उन्होंने कहा कि अगर किसी ने दो यूनिट उस समय रक्तदान न किया होता, तो हम आपको नहीं दे पाते। उन्हीं दो यूनिटों की वजह से उनकी जान बच गई तथा अब वे लोगों की जिंदगी को बचाने के लिए 86 यूनिट दान कर चुके हैं।

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