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महापुरुषों की वाणी इंसान के लिए दीपक के समान : साध्वी प्रीति भारती

3 वर्ष पहले
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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा राहों रोड पर स्थित गोमती नाथ मंदिर में रविवार को सतसंग करवाया गया। मुख्य वक्ता साध्वी प्रीति भारती ने कहा कि हमारे महापुरुषों की वाणी इंसान के लिए दीपक की तरह है, जिसकी रोशनी में इंसान हर क्षेत्र में अच्छे मुकाम को पा सकता है। हमारे महापुरुषों ने हमारे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास को मुख्य रखते हुए हमें जीवन के हर पहलु से अवगत करवाया है।

हम जानते है कि मानव एक चिंतनशील प्राणी है। जिसकी सोच हर वक्त कही ना कही चलती ही रहती है। कई बार किसी मानव का चिंतन बहुत ऊंचा चला जाता है और कई बार किसी मानव का चिंतन बहुत नीचे गिर जाता है। कई बार इंसान नकारात्मक विचारों के विषय में ही सोचता है और कई बार चिंता का ही चिंतन करता रहता है।

असल में इंसान को चिंतन की परिभाषा के बारे में ही पता नही है। जिस कारण वह हमेशा ही निराशा के आलम में घिरा रहता है। एक बच्चे के लिए उसकी मां की गोद और खिलौने ही चिंतन है।

साध्वी ने कहा कि महापुरुषों का चिंतन सांसारिक लोगो से भिन्न होता है। क्योंकि वह जब भी सोचते है तो शुभ ही सोचते हैं। इंसानियत के भले के लिए ही सोचते है। जहां इंसान चिंता को चिंतन समझने की भूल कर बैठता है, वहीं पर महापुरुषों के चिंतन में चिंता का हरण करने वाले प्रभु ही होते है। सांसारिक चिंतन को हम चिंतन की परिभाषा दे सकते है। आज हम संसार की ओर नजर दौड़ाकर देखे तो आज प्रत्येक मानव बुरे चिंतन की आग में झुलस रहा है। आज प्रत्येक इंसान दूसरे इंसान को पछाड़ कर आगे निकलना चाहता है चाहे इस के लिए किसी भी सीमा को क्यों न पार करना पड़े। हमारे महापुरुष जिस शुभ चिंतन की बात करते है उसे जानकर हमें महान व्यक्तित्व के दर्शन हो जाते है।

शुभ चिंतन का अर्थ जो प्रभु के साथ मिलने के पश्चात सोचा जाए। फिर ऐसे चिंतन में से स्वार्थ नही बल्कि परमार्थ की महक आती है। फिर दूसरों का भला करने से भी स्कून की प्राप्ति होती है। उन्होंेने कहा कि हमेशा परोपकार के कार्य करें तो भगवान की कृपा हासिल होती है और इंसान प्रभु परमात्मा से जुड़ता है। उसकी जिंदगी से मुश्किलों और कठिनाईयों का अंत होता है और वह भवसागर से पार हो जाता है।

इसलिए इंसान को हमेशा प्रभु सिमरन करना चाहिए ताकि वह इस जीवन रूपी भवसागर से पार होकर जीवन की समस्याओं और मुश्किलों को दूर कर सकेगा और प्रभु को प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि आज का इंसान काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार के जाल में फंसकर प्रभु सिमरन को भूल रहा है जो कि उसके जीवन में मुश्किलें पैदा करेगी, इसलिए हमेशा प्रभु का सिमरन करें और जीवन को सफल बनाएं ताकि कठिनाईयों और दुखों से दूर रहा जा सके और ईश्वर का आशीर्वाद हासिल किया जा सके। इस मौके पर भारी संख्या में संगत ने शामिल होकर प्रवचन सुने और अपना जीवन निहाल किया और प्रभु से सुख,समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के कार्यक्रम में प्रवचन करती हुईं साध्वियां। (दाएं) कार्यक्रम में उपस्थित संगत।

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