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10वीं पास छात्रों को दाखिला न देना गैरकानूनी

3 वर्ष पहले
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सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नवांशहर से दसवीं करने वाले कई छात्रों को स्कूल द्वारा ग्यारहवीं में दाखिला न दिए जाने के कारण सोमवार को कई बच्चों के पेरेंट्स ने स्कूल में नारेबाजी की। बच्चों ने अपने परिजनों और सीपीआई (एमएल) नेताओं को साथ लेकर नारेबाजी की।

पार्टी नेता जसबीर दीप और कुलविंदर बड़ैच ने कहा कि स्कूल द्वारा अपने ही बच्चों (जिन्होंने स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की) को ग्यारहवीं में दाखिला न देना पूरी तरह से गैरकानूनी है। स्कूल की ओर से दसवीं तक बच्चों को अपने स्कूलों में दाखिला के लिए न कोई मैरिट बनाई जाती है और न ही किसी तरह का कोई टेस्ट लिया जाता और ग्यारहवीं में पहले मैरिट बनाई गई और अब अपने ही बच्चों (जिनका मैरिट में नाम नहीं आया) का टेस्ट लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दसवीं बोर्ड की होती है और उसके बाद किसी तरह की मैरिट बनना व टेस्ट लिए जाने का औचित्य नहीं बनता। उन्होंने बताया कि मंगलवार को इस मामले को लेकर डिप्टी कमिश्नर के साथ मुलाकात की जाएगी और अगर इन बच्चों को दाखिला नहीं मिला तो संघर्ष तेज करने से गुरेज नहीं किया जाएगा। सरकारी स्कूल की ओर से इन बच्चों को अन्य स्कूलों (प्राइवेट) में जाने के लिए कहा जा रहा है जोकि पूरी तरह से गैर शैक्षणिक है। अगर ये बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने योग्य होते तो पहले ही न चले जाते। जसबीर दीप ने कहा कि सरकार लोगों को शिक्षा देने में नाकामयाब साबित हो रही है। इस मौके पर नरिंदर कौर, हसीना बेगम, फूलमती, सर्बजीत कौर, कुलविंदर कौर, राज रानी आदि मौजूद थे।

जसबीर दीप ने कहा कि सरकारी स्कूल के प्रबंधकों को स्कूल में दसवीं पास करने वाले बच्चों को ग्यारहवीं में दाखिला देने में प्राथमिकता दी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छठी से दसवीं कक्षा से पहले तक तो स्कूलों के अध्यापक लोगों से अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए मिन्नतें करते हैं और ग्यारहवीं में दाखिले के लिए नखरे दिखाए जा रहे हैं।

बच्चे आज डिप्टी कमिश्नर से करेंगे मुलाकात

स्कूल प्रबंधन के खिलाफ रोष जताते बच्चे और उनके अभिभावक।

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