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जन औषधि केंद्र में दवाओं का टोटा, बाजार से खरीदते हैं मरीज

3 वर्ष पहले
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नवांशहर सिविल अस्पताल ने भले ही कायाकल्प स्कीम के तहत 50 लाख रुपए का ईनाम जीता है लेकिन अस्पताल के जन औषधि केंद्र में अभी भी मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही। मरीजों को ज्यादातर दवाइयां बाहर की दुकानों से खरीदनी पड़ रही है। औषधि केंद्र में दवाइयों की कमी का कारण अस्पताल द्वारा डेढ़ साल से दवा कंपनी को भुगतान करना बताया गया है।

दवा कंपनी के अधिकारी उदय कुमार ने बताया कि सिविल अस्पताल की ओर से डेढ़ लाख रुपए का भुगतान नहीं करने पर 700 तरह की दवाइयों की सप्लाई बंद की गई है। ये जानकारी कंपनी के अधिकारी उदय कुमार ने दी। वहीं दूसरी तरफ एसएमओ डा. हरविंदर सिंह ने बताया कि जन औषधि केंद्र को सही ढंग से चलाने के लिए जल्द ही नया फार्मासिस्ट तैनात का प्रस्ताव रखा गया है। रोगी कल्याण समिति की बैठक में इस प्रस्ताव के पारित होने पर औषधि केंद्र को सही ढंग से चलाया जाएगा।

सिविल अस्पताल प्रबंधन और दवा कंपनी में पैसों के लेन-देन के बीच मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। क्योंकि डाक्टरों को उनके बड़े अधिकारियों के समझाने का असर नहीं है और वे बेखौफ मरीजों को अंदर की दवाइयां लिखने की बजाए बाजार की महंगी दवाइयां लिख रहे हैं। मरीजों ने बताया कि सरकार द्वारा सभी दवाइयां सिविल अस्पताल में भेजी जा रही हैं। इसके बावजूद डाक्टर बाहर की दवाइयां लिख देते हैं।

स्लिप की जांच करवा लेती हूं : सीएस- सिविल सर्जन गुरिंदर चावला ने कहा कि वह बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायत पर डाक्टरों की स्लिपों की जांच करवा लेती हैं। सभी स्लिप सीनियर मेडिकल अधिकारी से जांच करवाई जाएगी। अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल में दवाइयां लेने खड़े मरीज।

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