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सरकारी स्कूल में एडमिशन के लिए मारामारी में टैलेंट सर्च एग्जाम का स्टेट टॉपर भी पिछड़ा

3 वर्ष पहले
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नवांशहर व शहर के आसपास के बारह गांवों के विद्यार्थियों के लिए सिर्फ एक ही सीनियर सेकेंडरी स्कूल में साइंस स्ट्रीम होने के कारण प्लस वन में एडमिशन लेने के इच्छुक विद्यार्थियों को दर-दर भटकना पड़ता है। हालात ये हैं कि पिछले साल सरकारी स्कूलों की आठवीं के विद्यार्थियों के हुए पंजाब स्टेट टैलेंट सर्च एग्जाम में टॉप करने वाले मूसापुर स्कूल के ब्रिजेश को भी पहली कट ऑफ लिस्ट में जगह नहीं मिल पाई है। क्योंकि शिक्षा विभाग के सिस्टम में टैलेंट से ज्यादा नंबरों को तरजीह दी जाती है।

विडंबना देखिए पंजाब भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 30 हजार विद्यार्थियों में से टॉप करने वाले और पिछले साल 26 जनवरी पर अपनी इस उपलब्धि के लिए डीसी के हाथों सम्मान पाने वाले ब्रिजेश के नौंवी में 72 प्रतिशत नंबर आए हैं। सरकारी स्कूल में पहले कट ऑफ लिस्ट में 76 प्रतिशत तक गई है और ब्रिजेश कुमार को एडमिशन नहीं मिल पाया।

ब्रिजेश के 72 प्रतिशत अंकों से ज्यादा महत्वपूर्ण वे कठिन हालात हैं, जिनमें रहकर उसने पढ़ाई की। न कोई ट्यूशन और न ही घर में कोई पढ़ाई कराने वाला। दो कमरों के घर में बिना किसी सुविधा से इतने अंक लाना ब्रिजेश की लगन व मेहनत का ही नतीजा है। ब्रिजेश के माता-पिता यूपी के अलीगढ़ से आकर नवांशहर के गांव अमरगढ़ में बसे हुए हैं। उसके पिता ज्ञान सिंह पेंटर हैं और देहाड़ी पर काम करके परिवार का पालन पोषण करते है। ब्रिजेश चार भाई बहनों में दूसरे नंबर पर है और उसकी बहन बबीता व कविता भी उसी की तरह पढ़ने में होशियार हैं। बबीता ने भी आठवीं में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और वह अब मूसापुर के सरकारी स्कूल में नौंवी में पढ़ती है। ब्रिजेश ने भी मूसापुर के ही स्कूल से दसवीं की परीक्षा दी है, लेकिन मूसापुर के स्कूल में साइंस न होने के कारण वह नवांशहर में दाखिला लेना चाहता है। स्कूल की पहली कट ऑफ लिस्ट में नाम न आने से ब्रिजेश मायूस है और आर्ट्स पढ़ने की सोचने लगा है। ब्रिजेश की मां अंगूरी देवी कहती हैं कि उनकी व उनके पति ज्ञान सिंह की यही इच्छा है कि उनके बच्चे जहां तक पढ़ना चाहते हैं जरूर पढ़े। ब्रिजेश का सपना नॉन मेडिकल करके अध्यापक बनने का है और वह उसे सच होते देखना चाहती हैं।

डीसी भी ब्रिजेश को कर चुके हैं सम्मानित

टैलेंट सर्च एग्जाम में पंजाब टॉप करने के बाद जिला प्रशासन केे दिए सम्मान पत्र को दिखाते ब्रिजेश, अपनी मां और बहनों के साथ।

बच्चे होनहार हैं, एडमिशन होना चाहिए : प्रिंसिपल

ब्रिजेश व बबीता के अमरगढ़ स्कूल के प्रिंसिपल परविंदर सिंह और मूसापुर स्कूल के प्रिंसिपल राजेश कुमार ने कहा कि दोनों भाई-बहन अपनी आर्थिक स्थिति के बावजूद पढ़ने में होशियार हैं। ब्रिजेश को अपनी इच्छा के स्ट्रीम व सरकारी स्कूल में एडमिशन मिलना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिजेश ने पंजाब सरकार के टेलेंट सर्च एग्जाम में पंजाब भर में टॉप किया है और अगर ऐसे ही विद्यार्थियों को मनपसंद की एडमिशन न मिले तो फिर टेलेंट सर्च का क्या फायदा।

कम सीटों के कारण निजी स्कूलों में जाते हैं छात्र

जिला मुख्यालय व इसके आसपास के 12 गांवों के करीब दो हजार बच्चे हर साल दसवीं की परीक्षा देते हैं। इनमें से 800 बच्चे साइंस स्ट्रीम रखने के इच्छुक होते हैं लेकिन शहर में एक ही सरकारी स्कूल है, जिसमें साइंस की 110 के करीब सीटें हैं। एडमिशन न मिलने पर बच्चे एडिड व प्राइवेट स्कूलों में जाते है या फिर वे कामर्स या आर्ट्स स्ट्रीम में जाने को मजबूर होते हैं। ऐसे में नवांशहर में साइंस स्ट्रीम का और सरकारी स्कूल या फिर इसीमें साइंस का एक और यूनिट चलाया जाए।

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