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205 साल बाद मंगलवार को मनाई भगवान शनि की जयंती

3 वर्ष पहले
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पुराणों के अनुसार शनि देव का जन्म सूर्य के स्वामित्व वाले मक्षत्र कृत्तिका में हुआ था। अत इस दिन उनका जन्मदिन मनाए जाने का विधान है। विद्वानों की मानें तो 205 साल बाद मंगलवार को मनाई गई शनि जयंती। इसके चलते शैनिचरी अमावस्या पर मंगलवार को शहर के मंदिरों में न्याय के देवता का विशेष पूजन किया गया। शहर के मंदिरों में शनि से पीडि़त जातकों ने शनि यंत्र धारण किया, कुछ ने पीपल पूजा, काला वस्त्र एवं नारियल को तेल लगाकर काले तिल, उड़द की दाल, घी आदि वस्तुएं अंध विद्यालय, अनाथालय या वृद्धाश्रम में दान की। व्यापार में घाटा व कर्ज वालों ने अभिमंत्रित एकाक्षी श्रीफल एवं लघु नारियल को तेल एवं सिंदूर लगाकर सायंकाल शनि मंदिर में चढ़ाया, तो कुछ ने नदी में विसर्जित किया। शनि के पुजारी सतीश शर्मा ने बताया कि इस दिन भैंसे या घोड़े को चने खिलाना, लोहा, कोयला, उड़द के पकौड़े, इमरती, काले गुलाब जामुन, छतरी, तवा-चिमटा आदि वस्तुओं का दान किया जाता है।

शैनिचरी अमावस्या पर मंदिरों में हुए विशेष पूजन, शहर के मंदिरों मे लगा श्रद्धालुओं का तांता

मंदिर शिव धाम में शनि देवता की पूजा करती हुई महिलाएं व पं. अशोक कुमार। -भास्कर

शहर के इन मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़| शहर के पुरानी दाना मंडी के शनि मंदिर, कच्चा टोबा मंदिर, शिवाला पं. जय दयाल ट्रस्ट मंदिर, बाबा बालक नाथ मंदिर, माता नयना देवी मंदिर, स्नेही मंदिर, शिवधाम नेहरु गेट मंदिर, सप्थाशिवपुरी मंदिर, काइंया मोहल्ला में पीपल के नीचे बने शुगर मिल के पास शनि मंदिर के साथ-साथ पीपल के नीचे मंदिरों में भी विशेष पूजन हुए।

शनि जयंती के उपलक्ष्य में लंगर लगाया

बलाचौर। स्थानीय पुरानी अनाज मंडी में स्थित सीता-राम मंदिर में शनि जयंती के उपलक्ष्य में केक काटा गया। कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में हवन यज्ञ किया और आहुतियां डालकर सभी की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद लंगर लगाया गया। मौके पर मंदिर के महंत हरि दास, पप्पू सैणी, विकास शर्मा, कृष्ण लाल, प्रिंस, गोपी, बलविंदर, काला, बारू राम, नीला शर्मा मौजूद रहे।

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