डेंगू से बचने को कहीं न खड़ा होने दें पानी
जिला में वर्ष पिछले दो साल के दौरान डेंगू के 1167 केस पॉजीटिव पाए गए है। डेंगू से जिले में 4 लोगों की मौत हो चुकी है। इसका खुलासा सेहत विभाग से हासिल की गई रिपोर्ट से हुआ। उधर, डेंगू के सीजन शुरू होने से पहले सेहत विभाग की स्पेशल टीमों ने अपनी कमर कस ली। उन्होंने गांव से लेकर शहरों तक डेंगू के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। डाॅक्टरों ने मुताबकि डेंगू एडीस नामक मच्छर के काटने से होता है। डेंगू ज्यादातर साफ पानी में पैदा होता है। इसलिए कहीं भी अपने आसपास पानी खड़ा न होने दें। एयर कूलरों, फ्रीज और पानी की टंकियों में पानी हफ्त में एक से तीन बार बदलें।
जानकारी के अनुसार जिला स्तर पर इंस्पेक्टर कलेक्टर, ब्लाक फील्ड लेवल वर्कर, एएनएम, एचआई, आशा वर्करों को मिलाकर 535 वर्करों की टीमें लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक कर रही है।जिला एपेडेमियोलॉजिस्ट डॉ. जगदीप सिंह ने बताया कि जिले में डेंगू की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। तब नवांशहर में 377 केस सामने आए थे, जिनमें एक की मौत हो गई थी। उसके बाद वर्ष 2016 में बलाचौर, मुज्जफरपुर में 440 केस, नवांशहर, राहों, बलाचौर (रैलमाजरा) 250 केस व 3 की डेंगू के कारण मौत हुई।
वैसे डेंगू का माह जून से शुरू हो जाता है। जून से लेकर दिसंबर के पहले हफ्ते तक इसका सीजन चलता है। उस दौरान डेंगू के मामले बढ़ जाते है। इन सात माह में दो माह (अक्टूबर, नवंबर) ऐसे होते है, जिनमें डेंगू के केस बढ़ जाते है।
सेहत विभाग ने चलाया जागरुकता अभियान
तेज बुखार, उलटी आना डेंगू के लक्षण
सीनियर डॉक्टर दियाल स्वरूप ने बताया कि तेज बुखार, मास पेशियों व जोड़ों में दर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, शरीर में लाल रंग के दाने निकल आना, उलटी आना ये सब ये सब डेंगू के लक्षण है। ऐसे लक्षण हो तो मरीज को तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाएं। अस्पताल में डेंगू के मरीज की दवाई, इलाज, टेस्ट मुफ्त किए जाते है।
डेंगू के मरीज तरल पदार्थ का सेवन करें
सिविल सर्जन डॉ. गुरिंदर कौर चावला ने बताया कि डेंगू के मरीज को वैसे तो खाने पीने का पूरा परहेज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डेंगू के मरीज को जूस, लस्सी, ओआरएस का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। इस प्रकार की डाइट लेने से डेंगू का मरीज जल्द ठीक हो जाता है। इस बीमारी में इलाज से ज्यादा परहेज जरूरी है।