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कम अंकों वाले बच्चों को अपने ही स्मार्ट स्कूल में नहीं मिल रहा एडमिशन, परिजनों ने की नारेबाजी

3 वर्ष पहले
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सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं कक्षा में दाखिले के लिए बनाई मैरिट को लेकर स्कूल से दसवीं पास विद्यार्थियों के अभिभावकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए है। मैरिट में कम अंक लेने वाले बच्चों के नाम काटे जाने पर मंगलवार को एक दर्जन के करीब बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल में पहुंच कर रोष जताया।

दसवीं पास आकाशदीप के पिता राज कुमार और एक अन्य छात्र के पिता विनय वर्मा ने बताया कि उनके बच्चे छठी कक्षा में नवांशहर के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते हैं। दसवीं में उसके 61 प्रतिशत अंक आए हैं और स्कूल प्रबंधकों ने उनके बेटों को एडमिशन इसलिए देने से मना कर दिया कि उसके अंक मैरिट के हिसाब से कम हैं। उन्होंने कहा कि आकाशदीप जैसे कई ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूल नवांशहर से ही दसवीं की है और अब जब स्कूल में दाखिला मांगते हैं तो उन्हें कहा जा रहा है कि उनके नंबर कम है। उन्होंने कहा कि अपने ही बच्चों को एडमिशन देने को पहल दी जानी चाहिए, उसके बाद अन्य स्कूलों के बच्चों की मैरिट बनाई जाए। स्कूल प्रबंधक कह रहे हैं कि बच्चे टेस्ट दे दें, उसके बाद उन्हें दाखिला दे दिया जाएगा। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल का टेस्ट क्या बोर्ड से ऊपर हो गया। हर स्कूल अपने बच्चों को पहल देता है लेकिन जहां पर ऐसा क्यों नहीं। बच्चों के पेरेंट्स अकबर, पूजा, मनीष कुमार, रवि खान, मनदीप भाटिया, कमल कुमार, आकाशदीप, जसविंदर कुमार, रमनदीप, मोहित कुमार, अनिल कुमार, तरणजीत सिंह, धनवीर सिंह, अमृत पाल बैंस, हरप्रीत सिंह, दीपक कुमार, धर्मेंद्र आदि ने बच्चों को एडमिशन न देने पर रोष जताया। उधर, स्कूल के प्रिंसिपल सर्बजीत सिंह ने कहा कि इन बच्चों को टेस्ट देने को कहा गया है और वे टेस्ट पास कर लें, उन्हें एडमिशन दे दी जाएगी। जब उन्हें कहा गया कि अगर टेस्ट लेना ही है तो सभी का टेस्ट लिया जाए तो उन्होंने इसके बाद ट्रैफिक में फंसे होने का कहकर फोन काट दिया।

सवाल

स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते विद्यार्थी और उनके अभिभावक।

बोर्ड के टेस्ट में पास, तो क्या स्कूल है सुपर बोर्ड

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