मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर कर कमीशन लेते हैं डाॅक्टर
कायाकल्प-2017 प्रोग्राम में पहली पोजिशन पर रहे नवांशहर के सिविल अस्पताल में बर्निंग यूनिट नहीं है। अस्पताल में तीस प्रतिशत झुलसे मरीज का इलाज किया जाता है। उससे ज्यादा झुलसे हुए मरीजों को डॉक्टरों द्वारा दूसरे अस्पतालों को रेफर कर दिया जाता है।
जानकारी के अनुसार सिविल सर्जन के बार-बार मना करने के बावजूद डॉक्टर झुलसे हुए मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों को रेफर करते हैं। बताया गया है कि इन डॉक्टरों की शहर के कुछ चुनिंदा प्राइवेट अस्पतालों के साथ कमीशन की सैटिंग है। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक एक झुलसे हुए मरीज को रेफर करने पर सिविल अस्पताल के डॉक्टर को अच्छे पैसे मिल जाते हैं। उधर, डा. दयाल स्वरूप (अतिरिक्त सिविल सर्जन) से बात की तो उन्होंने बताया कि उनके पास इसकी कोई जानकारी है। फिर भी मामला उनके नोटिस में आ गया है, जो भी डॉक्टर प्राइवेट अस्पताल को मरीज रेफर करते पाया जाता है तो उसके पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, सीनियर मेडिकल अधिकारी हरविंदर सिंह ने बताया कि अस्पताल की दूसरी मंजिल में आम वार्ड में ही बर्निंग यूनिट है। उन्होंने कहा कि 50 फीसदी झुलसे मरीज को मेडिकल कालेज पटियाला, अमृतसर, डीएमसी, सीएमसी लुधियाना, सिविल अस्पताल जालंधर और 70 फीसदी झुलसे मरीज को पीजीआई रेफर किया जाता है। मंगलवार को सिविल अस्पताल की दूसरी मंजिल में बने जनरल वार्ड का जब दौरा किया गया तो पाया कि एक झुलसे मरीज का बैड एक अन्य मरीज के साथ लगा रखा था। बता दें कि झुलसे हुए मरीज के चारों तरफ हवा आने के लिए जाली लगी होनी चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नहीं था। वार्ड में चारों तरफ बदबू आ रही थी।
नवांशहर के सिविल अस्पताल में नहीं है बर्निंग यूनिट, 30 प्रतिशत से ज्यादा झुलसे मरीजों को डॉक्टर कर देते हैं रेफर
सिविल अस्पताल नवांशहर की दूसरी मंजिल का जनरल वार्ड, जहां पर आग से झुलसे व्यक्तियों का इलाज भी किया जाता है।
जिन अस्पतालों में मरीज को रेफर किया जाता है, वह 100 से 200 किमी. दूर
सिविल अस्पताल नवांशहर में तीस प्रतिशत से अधिक झुलसे हुए मरीजों को दूसरे शहरों के जिन सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाता है, वे कम से कम सौ से लेकर दो सौ किलोमीटर की दूरी पर है। नवांशहर के अस्पताल केवल 30 प्रतिशत झुलसे मरीज का ही इलाज करता है, जबकि पचास फीसदी को अन्य अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। इसमें अधिक गंभीर मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है।