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मीटरों से रुकेगी पानी की बर्बादी पर कौंसिल में कर्मियों की कमी

3 वर्ष पहले
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ऑडिट आब्जेक्शन के बाद जहां कौंसिल पांच मरले तक के घरों को फिर से वाटर सप्लाई व सीवरेज के बिल लगाने की तैयारी है, वहीं वाटर सप्लाई कनेक्शनों पर मीटर लगाने के प्रपोजल पर भी कौंसिल की वाटर सप्लाई शाखा द्वारा विचार किया जा रहा है। मीटर लगाने का मुख्य मकसद पानी की बर्बादी को रोकने के साथ साथ पानी के अधिक इस्तेमाल करने वालों से अधिक बिल वसूल करना भी है। फिलहाल लोकल बाडीज विभाग ने नगर कौंसिलों से राय मांगी है ताकि इस प्रपोजल को जमीनी स्तर पर लागू करने में आने वाली परेशानियों संबंधी चर्चा हो सके और कौंसिलों से सहमति भी ली जा सके।

जानकारी के अनुसार पानी की हो रही बर्बादी व भूजल स्तर गिरने से चिंतित निकाय विभाग ने नगर कौंसिल को पत्र जारी कर के उस पर राय देने को कहा है। बताया गया है कि नगर कौंसिल द्वारा वाटर सप्लाई के कनेक्शन पर मीटर लगाने की प्रपोजल है ताकि लोग जितना पानी इस्तेमाल करें उसके हिसाब से बिल अदा करना पड़े। लेकिन इस सिस्टम को लागू करने के लिए कौंसिल को और कर्मचारी भी रखने पड़ेंगे, जिसे लेकर कौंसिल ने अपनी मुश्किलें भी विभाग को बताई हैं। मुख्य समस्या कौंसिल में कर्मचारियों की कमी है। नए मीटर लगे तो मीटर रीडिंग पढ़ने, उसका डाटा तैयार करने के अलावा बिल बनाकर लोगों तक पहुंचाने के लिए स्टाफ की जरूरत है। जो मीटर लगाया जाना है उसका खर्च भी लोगों को अपने स्तर पर बहन करना पड़ेगा। जिससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। मगर कुल मिलाकर इस प्रपोजल से पानी की बर्बादी रोकने में कौंसिल को सहायता मिल सकती है। कौंसिल के सुपरिटेंडेंट अमरदीप सिंह का कहना है कि विभाग की तरफ से सुझाव के लिए दी गई प्रपोजल को कौंसिल बैठक में हाउस के समक्ष पेश किया जाएगा।

अभी जमीन के मुताबिक हैं एकमुश्त तय बिल

अभी पानी का बिल जमीन के क्षेत्र के अनुसार एकमुश्त तय हैं। शहर में 10 मरले तक के घर के लिए 105 रुपए प्रति माह, 20 मरले तक 140 रुपए , 40 मरले तक 280 रुपये प्रति मरले के अनुसार पानी की बिल लगाया जाना है। कौंसिल की ओर से इस मामले में जो राय विभाग को भेजी जा रही है, उसमें साफ लिखा है कि अभी तो फिक्स बिल भेजने के कारण उन्हें मीटर रीडिंग की जरूरत नहीं पड़ती। फिर मीटर की रीडिंग जांचने के लिए भी कम से कम तीन-चार कर्मचारियों का स्टाफ रखना होगा तथा बिलिंग का कंप्यूटर साफ्टवेयर भी बदलना पड़ेगा। कर्मचारियों की कमी से तो अभी भी कौंसिल जूझ रही है और पानी के बिल बांटने का काम ही तीन महीने पीछे चल रहा है।

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