जिला कानूनी सेवाएं अथाॅरिटी द्वारा बाल अपराध एक्ट पोस्को के अंतर्गत पर्चा दर्ज करने के दौरान अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया से संबंधित और पंजाब पीडि़त मुआवजा एक्ट 2017 संबंधित जिला पुलिस के जीओज और एनजीओज को जानकारी देने के लिए जिला पुलिस हैडक्वार्टर में सेमिनार लगाया गया। अथाॅरिटी के सचिव कम सीजेएम परिन्दर सिंह ने बताया कि किसी भी बाल के साथ अपराध की घटना की सूचना मिलने पर इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि पीडि़त के ब्यान लेने के लिए थाने न बुलाया जाए और उस का ब्यान लेने जाने वाला पुलिस अफसर वर्दी में न हो और कम से कम सब इंस्पेक्टर रैक का अधिकारी हो। पीडि़त और अपराधी की मेडिकल जांच करवाई जाए और केस की जांच से ले कर आखिर तक अपनाईं जाने वाली सावधानियां बनाए रखी जाए। इसके अलावा पंजाब पीडि़त मुआवजा एक्ट 2017 बारे थानों, पुलिस चौकी और सांझ केन्द्रों में बैनर लगा कर लोगों को जागरूक किया जाए। इस एक्ट के अंतर्गत अलग-अलग जुर्मों के पीडि़तों को मुआवजा लेने के लिए अपराध होने से 3 साल के अंदर-अंदर जिला या राज्य कानूनी सेवाएं अथाॅरिटी को आवेदन देना चाहिए जिस के साथ उनको अधिक से अधिक 5 लाख रुपए तक का पीड़ित मुआवजा मिल सकता है। मुआवजा लेने के हकदारों में तेजाब हमलों के पीडि़त, तेजाब के कारण हमलों में मौत होने पर, बलात्कार का शिकार, शारीरिक शोषण का शिकार नाबालिग, मानव तस्करी के पीडि़त, मृतक पर निर्भर, स्थायी और आंशिक अपाहिज, भ्रूण या जनन शक्ति के नुकसान के पीडि़त, जलन कारण 25 प्रतिशत से ज्यादा शारीरिक नुकसान के पीड़ित शामिल हैं। मुआवजा लेने के लिए आवेदक अपराध होने के तीन साल के अंदर-अंदर, अपराध पंजाब राज की हद में हों, पीडि़त को या उस पर निर्भर व्यक्ति को कोई भी राज या केंद्रीय स्कीम के अंतर्गत पहले मुआवजा न मिला हो और यदि पीड़ित 14 साल से कम है तो मुआवजा 50 प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है। उन्होेने कहा कि पीडि़त मुआवजा लेने के लिए समय पर आवेदन करें ताकि उन्हें उचित समय पर मुआवजा मिल सके और राहत दी जा सके। इस मौके पर पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
सेमिनार को संबोधित करते सीजेएम परिंदर सिंह, साथ हैं अन्य अधिकारी।