अंचल के किसानों ने सूखा पड़ने के बाद जैसे-तैसे कड़ी मेहनत के बाद रबी फसल धान को तो बचा लिया है। लेकिन सप्ताहभर से आंधी और बेमौसम बारिश के कारण धान खेत में लेट गए हैं। इसके कारण कटाई और मिंजाई के समय लेटी हुईं फसलों को काटने में दिक्कत का सामना करना पड़ा रहा है। वहीं रही सही कसर बेतहाशा कीट प्रकोप ने पूरा कर दिया है।
पीड़ित किसान श्याम गिरी, रिखी राम साहू, धनीराम, नेहरू, पुरानिक, चैतराम, तिहारू पटेल, भेसू नंद पटेल, भुनेश्वर, चेतन साहू, बृजलाल ध्रुव, दुकालू राम ने बताया कि मौसम की बेरुखी के कारण हार्वेस्टर से धान कटाई का काम चल रहा है। लेकिन बीच-बीच में बदली, बारिश और आंधी ने खेतों में खड़ी फसल को तबाह तो कर दिया ही है। साथ ही धान के पौधे तेज हवा से टूटकर इधर-उधर जमीन पर बिखर गए हैं। ऊपर से खेत भी गीला हो गया है। इसके कारण हार्वेस्टर से कटाई करना मुश्किल हो गया है। वहीं मजदूरों की कमी के चलते भी कटाई प्रभावित हो रही है।
धान काला पड़ा-औने-पौने दाम पर खरीदी : किसानों का कहना है कि बारिश से पहले धान की मिंजाई के बाद बेचकर अपना काम समाप्त कर खरीफ फसल के काम में जुट जाएंगे। पीड़ित किसानों ने दुखड़ा बताते हुए कहा कि प्रति एकड़ 12 से 15 हजार रुपए तक खर्च आता है, लेकिन बारिश के कारण धान पानी पड़ने के कारण खराब हो रहा है। धान का रंग काला पड़ गया है, ऐसे धान को न व्यापारी खरीद रहे हैं और न ही ठीक से चावल खाने के लिए बन पाएगा तथा बीज के काम भी नहीं आएगा।
राजिम. आंधी और बारिश से धान के पौधे खेतों में गिर गए हैं।
रबी धान भी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए
कृषक सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर साहू का कहना है कि किसान सभी तरह से शोषित हो रहे हैं। मंडी में धान बेचने किसान ले जा रहे हैं, जहां पर खुले में पड़ा धान पानी में भीग कर खराब हो गया है। किसानों की हालत को देखते हुए शासन द्वारा रबी धान को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने व्यवस्था करनी चाहिए।