प्रदेश में किसान आंदोलन की तैयारी फिर से शुरू हो गई है। विभिन्न किसान संगठनों ने 1 से 10 जून तक दूध, फल, सब्जी व उपज की सप्लाई रोकने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने इसको देखते हुए प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी है। खुफिया एजेंसियों ने भी प्रशासन सहित सरकार को अलर्ट कर दिया है। इसमें 70 फीसदी से अधिक किसान शामिल होंगे। इसके बाद कलेक्टर ने जिले में धारा 144 को अब 15 जुलाई तक बढ़ाने का आदेश जारी किया है।
खुफिया विभाग से मिली सूचनाओं के बाद जिले में प्रशासन पुख्ता तैयारियों में जुट गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा. 144 के अंतर्गत जनसामान्य के कल्याण के लिए एवं लोक शांति बनाए रखने के लिए जिले में लागू धारा 144 को अब 17 जुलाई तक बढ़ा दिया है। इस दौरान आपत्तिजनक अथवा उद्वेलित करने वाली फोटो, चित्र, संदेश करने पर, सांप्रदायिक अथवा अन्य सामाजिक वैमनस्यता पैदा करने वाले संदेश भेजने, उनको शेयर करने, ट्विटर, फेसबुक, वाट्सएप आदि सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अथवा अन्य सामाजिक वैमनस्यता पैदा करने वाले संदेश भेजने, शेयर या कमेंट्स करने पर प्रतिबंध रहेगा। इसका उल्ल्घंन करने वाले के विरुद्ध धारा 188 भारतीय दंड विधान अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान जिले में धरना, जुलूस, प्रदर्शन, रैली निकालने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
सरकार ने किसान संगठनों से चर्चा के लिए कहा
प्रशासन के अधिकारी व पुलिस गांव-गांव में सद्भावना बैठक कर किसानों से रूबरू हो रहे हैं। प्रदेश सरकार ने जिलास्तर पर किसान संगठनों, विपक्षी दल के किसान नेताओं से चर्चा करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह ने गत दिनों किसानों और संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक कर बिजली, कृषि, मंडी, पीएचई, सिंचाई के साथ कई विभागों में आ रही समस्याओं पर चर्चा की। तहसीलदार गोपाल सोनी ने बताया किसानों की समस्याओं को हल करने का प्रयास किया जा रहा है और संभावित आंदोलन पर भी नजर है। शहर में रोज करीब 50 हजार लीटर दूध की खपत होती है। ज्यादातर दूध गांवों से आता है और दूध डेयरियों से उपलब्ध होता है। सब्जियां जिले के गांवों व राजस्थान से भी आती है।