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‘जीवन में जब तक सत्संग नहीं तब तक आनंद नहीं’

3 वर्ष पहले
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नीमच | जब तक जीवन में सत्संग नहीं होगा तब तक आनंद नहीं होगा। जिस प्रकार प्यास लगने पर पानी, भूख लगने पर भोजन चाहिए उसी प्रकार आत्मा तत्व को भी भगवान की शरण चाहिए। जो भगवान का बन जाता है, भगवान उसे नही छोड़ते हैं। यह बात पं. मनीष शंकर महाराज ने स्कीम नं. 36 में आयोजित भागवत कथा में कही। उन्होंने कहा गुरु की कृपा से ही गोविंद की प्राप्ति होती है। नारद जी के वचन सुनकर ध्रुव को भगवान प्राप्त हुए। भगवान को प्राप्त करना है तो अपने काम, क्रोध की बली देना चाहिए। ऋषभ देव के अवतार की कथा प्रसंग सुनाते हुए कहा ऋषभ देव के सौ पुत्र हुए। जिसमें बड़े पुत्र भरत हुए। ऋषभ देव ने अपना जीवन भगवान की भक्ति में समर्पण कर दिया और राज गद्दी पर भरत को बैठा दिया। भरत ने न्याय पूर्वक राज काज की प्रथा का पालन किया। भावगत कथा में अजामिल चरित्र का वर्णन और प्रहलाद चरित्र का संवाद सुनाए।

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