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स्कीम नंबर 34/36 में नियम विरुद्ध हो रहे निर्माण, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

3 वर्ष पहले
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शहर के स्कीम नं. 34/36 के भूखंडों को लेकर नपा में खींचतान चल रही है। परिषद के सम्मेलन में कई बार इस मुद्दे को उठाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही। मामला कई बार उठा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से नियम विरुद्ध निर्माण तेजी से हो रहे हैं।

कांग्रेस पार्षद योगेश प्रजापति ने नपाध्यक्ष राकेश जैन पर आरोप लगाते हुए कहा कि 15 वर्ष जैन ने ही पार्षद रहते हुए स्कीम नं. 34/36 का भूखंड घोटाला उजागर किया था। जांच में करीब 100 भूखंड का आवंटन अवैध घोषित किया था, इसके बाद से यह मामला नपा के लिए सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। सत्ता पक्ष कुछ पार्षद भूखंडों के नामांतरण कराने की जिम्मेदारी ले रहे हैं। इनसे संपर्क किए बगैर नामांतरण का आवेदन देने वाले भूखंडधारी को परेशान करने के लिए आपत्ति लगा देते हैं। वैध भूखंड होने के बावजूद नामांतरण नहीं हो रहा है। उसका स्पष्ट उदाहरण भानुमति अम्ब हैं जिन्हें नामांतरण के नाम पर भारी परेशान किया तो उन्होंने आत्मदाह की चेतावनी दी। स्कीम नं. 34/36 में करीब 100 भूखंड 600 से 2200 स्क्वेयर फीट तक है। एक भूखंड 20 से लेकर 40 लाख रुपए तक के हैं। इसके आधार पर करीब 80 करोड़ रुपए का भूखंड घोटाला है, जिस पर आज कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।नपा कार्यालय से स्कीम नं. 34/36 का रिकॉर्ड गायब कर चुके हैं, उसके बाद भी जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रजापति ने कहा कि जनहित में भूखंड घोटाले मामले में नपाध्यक्ष के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर आंदोलन किया जाएगा।

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