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रेतम नदी से रेत निकालने के लिए पानी में उतारीं मशीनें, खनिज विभाग को नहीं दिख रहीं / रेतम नदी से रेत निकालने के लिए पानी में उतारीं मशीनें, खनिज विभाग को नहीं दिख रहीं

Neemuch News - खनन माफिया और खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से जिले में नदियों से रेत तथा खदानों से लाल पत्थर का अवैध खनन हो...

Bhaskar News Network

Jun 21, 2018, 04:05 AM IST
रेतम नदी से रेत निकालने के लिए पानी में उतारीं मशीनें, खनिज विभाग को नहीं दिख रहीं
खनन माफिया और खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से जिले में नदियों से रेत तथा खदानों से लाल पत्थर का अवैध खनन हो रहा है। माफिया आंतरी-कुंदवासा में नदी में मशीनें डालकर रेत निकाल रहे हैं। राजस्थान से रोज 70 से अधिक बालू रेत के डंपर जिले में आ रहे हैं। गांव से शहर तक जगह-जगह रेत के ढेर लगाकर स्टॉक किया जा रहा है।

जिले के रामपुरा, चचौर, देवरान, कुंडला, आंतरी, चंबलेश्वर बांध क्षेत्र, सेमली इस्तमुरार, हासपुर, डांगड़ी, मजीरिया, जन्नौद, दुरगपुरा, कुंडला, खान खेड़ी, कुंदवासा, मातारूंडी, कराडिय़ा, डोरिया खेड़ी, रायपुरिया, सिंगोली की ब्राह्मणी नदी, अठाना क्षेत्र में तुंबा नदी, पालसोड़ा के समीप रेतम नदी से रेत का अवैध उत्खनन होता है।

खनिज विभाग ने साल छह महीने में कागजी खानापूर्ति की कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी कर देते हैं। प्रदेश सरकार के खनिज विभाग के उपसचिव राकेश श्रीवास्तव को जिले का कलेक्टर बनाया है। उनके लिए अवैध उत्खनन रोकना बड़ी चुनौती हाेगा। नवागत कलेक्टर को दिखाने के लिए विभाग के अधिकारियों ने दो-तीन कार्रवाई कर खानापूर्ति कर ली है। लेकिन जमीनी स्तर पर अवैध खनन जोरों पर है। जिले की कुछ नदियों में पानी नहीं होने के कारण वह माफिया बारिश के बाद अवैध रेत खनन का काम शुरू करेंगे।

राजस्थान में प्रतिबंध के बावजूद जिले में बालू रेत के रोज आ रहे डंपर, जगह-जगह माफियाओं ने किया स्टॉक

कुंदवासा में नदी से माफियाओं द्वारा मशीन से ऐसे निकाली जाती है रेत।

माफिया की वजह से पत्थरों की खदानें हो गईं कम

सिंगोली तहसील क्षेत्र में माफिया बिना टैक्स चुकाए रोज लाखों का पत्थर खनन कर रहे हैं। फुसरिया, चकछोड़ीजर, बड़ी, कवाई क्षेत्र में माफियाओं के खिलाफ शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई और लोगों ने खदानाें को बंद कर दिया है। 2012-13 में जहां 85 पत्थर खदानें थी वहीं अब 4-5 खदानें ही रह गई है। पत्थर ढोने का काम टर्बो वाहन के माध्यम से किया जाता है। एक टर्बो में 40 से 50 टन माल आता है। वैध खदान संचालकों को रॉयल्टी व अन्य दस्तावेज की कार्रवाई पूरी कर एक टर्बो पत्थर निकालने में लगभग 35 हजार रुपए का खर्चा बैठता है। यही माल 45 से 50 हजार रुपए में बिकता है। जबकि माफिया 35 हजार रुपए में ही एक टर्बो माल बेच रहे है।

3 हजार ट्रॉली रेत के ढेर

जिले में नीमच, जावद और मनासा क्षेत्र में छोटी बड़ी नदियों से रोज रेत खनन हो रहा है। आंतरी और कुंदवासा में माफिया रेतम नदी से मशीन डालकर रेत खनन कर रहे हैं। कुंदवासा व आंतरी क्षेत्र में दो से तीन हजार ट्रॉली रेत के ढेर लगे हुए हैं। जावद क्षेत्र के बावल, बावल नई, उम्मेदपुरा, तारापुरा, अठाना, धनेरिया, तुंबा गांवों में गंभीरी नदी से रेत अवैध रूप से निकाली जा रही है। सिंगोली और रतनगढ़ क्षेत्र में भी रेत का अवैध खनन हो रहा है।

रोज आ रही 70 से अधिक डंपर बालू रेत

एक डंपर मालिक ने नाम न छापने पर की शर्त पर बताया राजस्थान से बिना रॉयल्टी की बालू रेत के 70 से अधिक डंपर रोज शहर व नयागांव क्षेत्र में आते हैं। एक डंपर करीब 22 हजार रुपए में बेचा जाता है। इसी तरह 90 ट्रेलर रोज मंदसौर, नीमच जिले में आ रहे हैं। एक ट्रेलर 35 से 38 हजार रुपए में साइड पर खाली होता है।

सिंगोली क्षेत्र की खदानों में इस तरह निकालते है माफिया लाल पत्थर।

मुरम खनन कर जमीन खोखली कर रहे

जिले में मुरम खनन के 8 परमिट जारी हैं। लेकिन अवैध खनन शहर से गांव तक हो रहा है। नीमच के भोलियावास, चौथखेड़ा, बरुखेड़ा, हवाई पट्टी पर जगह-जगह खनिज माफिया सक्रिय है। दिन-रात अवैध खनन हो रहा है लेकिन कार्रवाई के नाम पर एक-दो प्रकरण बनाकर विभाग कागज पूरे कर लेता है। चीताखेड़ा, चैनपुरा, सिंगोली रोड, जीरन, मनासा, सावन कुंड, पड़दा, कंजार्डा क्षेत्र में अवैध उत्खनन जोरों पर है। पिछले दिनों ही चौथखेड़ा के ग्रामीणों ने नीमच की नपा के जेसीबी को अवैध खनन करते हुए रात में पकड़ा था और तीन डंपरों को जब्त करवाया था।

लगातार कार्रवाई कर रहे हैं

इस मामले में जिला खनिज अधिकारी जेएस भिड़े ने कहा विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। एक वर्ष में 70 लाख रुपए का जुर्माना वसूला है। शिकायत मिलते ही टीम पहुंचकर खनन माफियाओं पर कार्रवाई करती है।

रेतम नदी से रेत निकालने के लिए पानी में उतारीं मशीनें, खनिज विभाग को नहीं दिख रहीं
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रेतम नदी से रेत निकालने के लिए पानी में उतारीं मशीनें, खनिज विभाग को नहीं दिख रहीं
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