दीनदयाल रसोई योजना की तर्ज पर कृषि उपज मंडी में किसानों को पांच रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध करवाया जाएगा। जिला प्रशासन इसकी योजना बनाई है। संभवत जून से इसे लागू किया जाएगा। संपूर्ण व्यवस्था मंडी प्रबंधन द्वारा की जाएगी।
गत दिनों कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह ने कृषि मंडी का निरीक्षण किया था। इस दौरान किसानों ने कैंटीन में सफाई व स्वच्छ भोजन नहीं मिलने की शिकायत की थी। इसको गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने व्यवस्था सुधारने की रणनीति तैयार की। तहसीलदार गोपाल सोनी ने बताया मंडी में रोज 5 हजार किसान उपज बेचने आते हैं। उन्हें अच्छा भोजन नहीं मिलने से भूखा रहना पड़ता है। इसको देखते हुए कलेक्टर ने दीनदयाल रसोई की तर्ज पर मंडी में भी पांच रुपए में किसानों को भरपेट भोजन करवाने की तैयार की है। इस संबंध में मंडी प्रशासन को व्यवस्था जुटाने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। मंडी सचिव आरके बघेल ने कहा कैंटीन व्यवस्था चल रही है। प्रशासन के निर्देश के अनुसार काम करेंगे। नई मंडी में सर्वसुविधायुक्त कैंटीन की सुविधा रहेगी।
योजना
मंडी में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को किसानों ने बताई थी समस्या, मंडी प्रबंधन के माध्यम से शुरू होगी व्यवस्था
अभी उपज छोड़कर होटलों पर जाते हैं नाश्ता करने
उपज लेकर आए दिलीप पाटीदार, कमल शर्मा और कालूराम जाट ने बताया मंडी के कैंटीन में अच्छी सुविधा नहीं है। बाहर होटलों पर नाश्ता करने जाना पड़ता है। उपज के साथ दो लोगों का आना पड़ता है। नीलामी में देरी होने पर एक को उपज की रखवाली करना पड़ती है। एक ही किसान के रहने पर वह उपज को छोड़कर नाश्ता करने चला जाता है तो उपज की बोरी चोरी हो जाती है।
कैंटीन में नहीं होती सफाई
मंडी में किसानों के लिए कैंटीन हैं लेकिन पर्याप्त सफाई नहीं होती। इस कारण यहां पर नाश्ता का उचित नहीं समझते। किसानों ने कलेक्टर को इस समस्या से अवगत कराया। इसके बावजूद यहां की व्यवस्था नहीं सुधरी। प्रभुलाल मेघवाल और रामनारायण धाकड़ ने बताया कैंटीन में बैठने की व्यवस्था भी नहीं है। खाद्य सामग्री भी अच्छी नहीं होने से इसका कम लोग ही सेवन करते हैं। नीलामी के इंतजार में रुकना पड़ता है तो बाहर होटल पर नाश्ता करते हैं।