नए श्रद्धा भवन पर 6 महीने से ताला, पेड़ के नीचे बैठ रहे श्रद्धालु
भास्कर संवाददाता | नीमच/भादवामाता
देवी तीर्थ भादवामाता मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 2.80 करोड़ रुपए की लागत से श्रद्धा भवन छह महीने पूर्व बनकर तैयार हो गया है। लेकिन लोकार्पण के इंतजार में भवन ताले में बंद है। इसकी सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल का निर्माण भी नहीं हुआ है। गर्मी में श्रद्धालुओं को पेड़ व तंबू के नीचे बैठना पड़ रहा है।
भादवामाता मास्टर प्लान के तहत श्रद्धालुओं के लिए तीन मंजिला श्रद्धा भवन में 40 कमरे अटैच लेट-बाथरूम, 10 बड़े हॉल, वाहन पार्किंग बनाया गया। रंग-रोगन के साथ भवन तैयार हो गया है। लेकिन इसके ताले फीता काटने की रस्म में अब तक नहीं खुले हैं। इंदौर से माता के दर्शन करने पहुंची कनकलता अग्रवाल और सुमनलता अग्रवाल ने कहा कि भादवामाता में रहने के लिए कोई अच्छी धर्मशाला नहीं मिली। श्रद्धा भवन भी ताले में बंद है। दिन में मंदिर परिसर में पेड़ों की छांव में बैठे रहे। रात नीमच की होटल में गुजारी। इसी तरह मंदिर के पास ही तिरपाल के तंबू तानकर बैठी ज्योतिबाई का कहना है इतना बड़ा श्रद्धा भवन बना दिया है लेकिन श्रद्धालु़ओं को रहने नहीं दिया जा रहा है। बारिश में यहां श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ जाएगी। मंदिर प्रबंधन का कहना है मैदान समतलीकरण और बाउंड्रीवॉल बनने के बाद लोकार्पण होगा।
भादवामाता में पेड़ों की छाया में सोए श्रद्धालु।
समाज की धर्मशाला ही आसरा, परेशान हो रहे श्रद्धालु
वर्तमान में मंदिर परिसर में अलग-अलग समाज की धर्मशाला है। जहां श्रद्धालु ठहरते हैं। हर साल 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन को आते है। दानपात्रों से 1 करोड़ से अधिक का चढ़ावा मिलता है। मान्यता है विक्रम संवत 1482 भादवामाता का प्राकट्य माना है। मंदिर से लगी बावड़ी के पानी से नहाने और पीने से लकवा (पैरालिसिस) सहित अन्य रोग दूर होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार पानी में कोई ऐसा तत्व है। इसके कारण ऐसा होता है।