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एक वर्ष से वृद्धाश्रम में रह रहीं सोनाबाई को फिर मिलेगा बेटों का सहारा, कब्जे में ली जमीन का हक भी वापस देंगे

3 वर्ष पहले
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वृद्धाश्रम में रह रही भादवामाता निवासी सोनाबाई को फिर बेटों का सहारा मिलेगा। एक वर्ष पहले बेटों ने मां के नाम दर्ज जमीन पर कब्जा करके वृद्धाश्रम भेज दिया था। मदर्स डे पर भास्कर ने सोनाबाई की पीड़ा को प्रकाशित किया। नागदा समाज के वरिष्ठजन आगे आए और पहले महिला से फिर उनके बेटों से चर्चा कर समझाइश दी। इस पर महिला को फिर से अपने साथ रखने के लिए बेटे तैयार हो गए। अब जल्द ही सोनाबाई को बेटों का सहारा मिलेगा तथा परिवार के साथ जीवन गुजार सकेगी।

भादवामाता निवासी सोनाबाई पति कन्हैयालाल नागदा को पारिवारिक विवाद के चलते तीनों बेटों ने घर से बाहर कर दिया था। जमीन बंटवारे में सोनाबाई के हिस्से की जमीन पर भी कब्जा कर लिया था। महिला को वृद्धाश्रम में जीवन गुजारना पड़ रहा था। मदर्स डे पर भास्कर ने सोनाबाई से चर्चा कर उनकी पीड़ा को सुना तथा प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर नागदा समाज के वरिष्ठ बाबूलाल, एडवोकेट प्रवीण मित्तल सोनाबाई से मिलने पहुंचे। उन्होंने चर्चा में बेटों के साथ रहने की इच्छा जताई। इस पर दोनों बुधवार सुबह भादवामाता पहुंचे। जहां ग्राम पटेल देवीलाल नागदा की उपस्थिति में महिला के बेटे भंवरलाल और पूरण के घर पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे चर्चा कर रिश्तों के सम्मान की समझाइश दी। इस पर बेटों ने मां को अपने साथ रखने की सहमति दी। अब जल्द ही सोनाबाई को फिर से उनके घर पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। गौरतलब है कि सोनाबाई के नाम 12 बीघा जमीन थी। जिसके चार हिस्से होने पर एक हिस्सा स्वयं के नाम तथा तीन हिस्से बेटों के नाम कर दिए थे। बंटवारे के कुछ समय बाद ही बेटों ने मां को वृद्धाश्रम में भेज दिया था। तभी से सोनाबाई वहां रहकर अपने बेटों के आने का इंतजार कर रही है। तीनों बेटे भादवामाता में ही दुकान लगाकर कारोबार करते हैं।

सामाजिक पहल

मदर्स-डे पर भास्कर ने खबर प्रकाशित की तो नागदा समाज के वरिष्ठ आगे आए, बेटों को रिश्तों के सम्मान की समझाइश दी

पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में करेंगे कार्रवाई

समाजसेवी बाबूलाल नागदा ने बताया सोनाबाई नीमच वृद्धाश्रम से घर ले जाने के लिए उनके बेटे एक-दो दिन में आएंगे। सोनाबाई को समझाइश देकर घर भेजा जाएगा। ताकि वह परिवार में बेटे-बहु के साथ पोते-पोतियों के बीच सम्मान के साथ रह सके। यह प्रक्रिया पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में की जाएगी। ताकि भविष्य में किसी भी स्थिित में महिला बेसहारा नहीं हो सके।

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