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हृदय में सरलता होगी तो ही धर्म टिकेगा -साध्वी गुणरंजनाजी

3 वर्ष पहले
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जब तक हृदय में सरलता नहीं होगी धर्म टिकेगा नहीं। इसके लिए भावों को शुद्ध करना होगा भी सम्यक श्रद्धा आएगी। मन पवित्र हो तभी जीवन का कल्याण होगा।

यह बात साध्वी गुणरंजना श्रीजी ने विकास नगर स्थित महावीर जिनालय में धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा जीवन को सरल बनाने के लिए आत्म चिंतन करना होगा। वीतराग वाणी श्रवण करते ही मन की प्रवृति में बदलाव आ जाता है। मन में श्रद्धा भाव से आत्मा जागृत कर सकते हैं। भाव बदलने से जीवन में धार्मिक दृष्टि से बदलाव होगा। जिसने समय रहते आत्मा को जागृत कर लिया वह सजग साधक होता है। प्रभु की जिनवाणी सुनकर आचरण में लाना चाहिए। संसार में भावों की तुलना धन दौलत से नहीं हो सकती है। संसार के प्रत्येक प्राणी के कल्याण करने वाले महापुरुष के प्रति श्रद्धा धर्मसभा आएगी तो जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन होगा। मन में करूणा पुण्य के भाव आना चाहिए। श्रद्धा समर्पण को कभी तराजू में नहीं तौल सकते।

चातुर्मास

विकास नगर स्थित महावीर जिनालय में धर्मसभा के दौरान श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने कहा

महावीर जिनालय में प्रवचन सुनती महिलाएं। इनसेट: प्रवचन देते साध्वी गुणरंजना श्रीजी।

‘सिद्धांतों पर चलने से मिलती है सफलता’

नीमच |
जीवन में एक सिद्धांत भी दृढ़ता पूर्वक अपना ले तो वह आगे बढ़ जाता है। दृढ़ संकल्प से ही सफलता मिलती है। अब्राहम लिंकन एक साधारण लकड़हारा था लेकिन उनकी सादगी और निरंतर असफलता के बावजूद भी निराश नहीं होने की प्रवृति ने उन्हें अमेरिका जैसे देश का राष्ट्रपति बनने का अवसर दिया। सफलता आशा और दृढ़ संकल्प से ही मिलती है। यह बात साध्वी उपेंद्र यशा श्रीजी ने जैन श्वेतांबर भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के पुस्तक बाजार आराधना भवन आयोजित धर्मसभा कही। उन्होंने कहा जो होता है अच्छे के लिए ही होता है। ध्येय वाक्य को जीवन में आत्मसात कर चले तो सफलता हमारे कदमों में होनी। चिंटी बार-बार ऊपर चढ़ती है और गिर जाती है लेकिन अंत में वह ऊपर चढ़ने में सफल अवश्य होती है। किसी असफलता पर निराश नहीं होना चाहिए। बल्कि सफलता के लिए वहीं से पुनः लक्ष्य के लिए अभ्यास करना चाहिए तो सफलता अवश्य मिलती है। युवा वर्ग मन से कभी हताश निराश नहीं हो तो वह कठिन कार्य भी सरलता से कर सकते हैं। हम स्वस्थ रहेगें तो कार्य भी अच्छे ही होंगे।

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