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सोयाबीन और उड़द में लगा पीला रोग, बारिश नहीं होने से ग्रोथ रुकी

3 वर्ष पहले
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जिले में मौसम की बेरुखी का असर सोयाबीन, उड़द फसल पर दिखाई देने लगा है। खेतों में फसल पीली पड़ने लगी है। इससे किसान चिंतित है। 23 जुलाई के बाद से बारिश नहीं होने पर पहले इल्लियों का प्रकोप बढ़ा अब पौधों में रोग की समस्या बढ़ गई, पौधे सूखने लगे हैं। फली में दाने की ग्रोथ रुक गई है।

राजू गुर्जर चीताखेड़ा, तुलसीराम पंवार मोरवन ने बताया उड़द की फसल पीला पड़ने लगी है। दवा छिड़काव भी बेअसर हो रहा है। इस बार क्षेत्र में 1 लाख 25 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन और करीब 14 हजार हेक्टेयर में उड़द की बोवनी हुई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीपी पचौरी ने बताया फसलों में पीलापन सामान्य अवस्था में होती है। दवा का स्प्रे करने से रोग बढ़ता नहीं है सिर्फ रोक लग जाती है।

जावद ब्लॉक सिंगोली, मोरवन, लालपुरा, बावल, मेलानखेड़ा, नीमच के चीताखेड़ा, जीरन, हर्कियाखाल, हरवार क्षेत्र में सोयाबीन व उड़द के पत्ते मुरझाकर पीले पड़ गए हैं। किसानों को उत्पादन प्रभावित होने की आशंका सता रही है। उड़द को पकने में अभी समय लगेगा। सोयाबीन पर पीला रोग सेमीलूपर नजर आ रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार सोयाबीन, उड़द में पीलापन फसल को मौसम के अनुकूल बनता है। यह सामान्य अवस्था में होता है। दवा के छिड़काव से रोग पर रोक लग सकती है। कृषि विशेषज्ञ थायोमेथोक्सोम 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर में 500 से 600 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें ताकि पीलापन रोग आगे नहीं बढ़ सकेगा।

बारिश की खेंच के कारण खेतों में सोयाबीन फसल के पत्ते इस तरह होने लगे पीले।

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