माचिस की तिली से सीख रहे अक्षर, कंकरों से कर रहे जोड़-घटाना
2 अप्रैल से स्कूलो में शुरू हुए नए शिक्षा सत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई में रूचि बढ़ाने के लिए नए प्रयोग किए जा रहे हैँ। रोचक गतिविधियां करवाकर विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है। बिना किताब के विद्यार्थी खेल-खेल में अक्षरों काे पहचानकर पढ़ना सीख रहे हैं। माचिस की तिल से अक्षरो का ज्ञान करवाया जा रहा है। गणित के लिए कंकरो का उपयोग करके जोड़-घटना सिखाया जा रहा है। विद्यार्थी इसमें उत्साह से भाग रहे हैं।
यह कवायद जॉयफुल लर्निंग पैटर्न के तहत की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस सत्र में अप्रैल माह में जॉयफुल लर्निंग पैटर्न पर विद्यार्थियों को पढ़ाने के निर्देश दिए है। इसके लिए शिक्षको को मेहनत करना पड़ रही है। विभिन्न खेल और गतिविधियां करवाकर विद्यार्थियों को सिखा रहे हैं। विद्यार्थियों को प्रेरक कहानियां सुनाई जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी किताबी पढ़ाई के अलावा अन्य रोचक तरीको से भी पढ़ना सीखे। प्रयोग देखकर विद्यार्थी आसानी से विषयों को समझ सकेंगे। पढ़ने में रूचि बढ़ेगी। किताब से पढ़कर समझने में आसानी होगी।
स्कूलो में जायफुल लर्निग पैटर्न से करवाई जा रही पढ़ाई, रूचि ले रहे विद्यार्थी
जायफुल लर्निंग पैटर्न पर विद्यार्थियों को गणित सिखाया जा रहा है।
हिंदी और गणित विषय पर ज्यादा दे रहे ध्यान
जायफुल लर्निंग पैटर्न से पढ़ाने में हिंदी और गणित विषय को शामिल किया गया है। भोटा स्कूल प्रधान पाठक कविता गावंडे और देवरी प्रधान पाठक संतोष निंभोरकर ने बताया कक्षा पहली से 5वींं तक के विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। माचिस की तिली और कंकरो का उपयोग कर जोड़-घटाना सिखा रहे हैं। हिंदी के अक्षरो का ज्ञान करवाया जा रहा है। आकृतियां बनाकर पढ़ाई को रोचक बनाया जा रहा है। हिंदी और गणित विषय पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। 28 अप्रैल तक जायफुल लर्निंग के तहत गतविधियां कराई जाएगी। इन गतविधियों से मानसिक विकास होगा।