नेपा मिल प्रतिनिधि संघ के सचिव रविशंकर पवार ने केंद्रीय राज्यमंत्री भारी उद्योग मंत्रालय के बाबुल सुप्रीयो, सांसद नंदकुमारसिंह चौहान सहित नेपा मिल प्रबंधन को पत्र लिखकर प्रस्तावित 400 कर्मचारियों के स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति में 2007 के वेज-रिवीजन को आधार बनाने की मांग की है। 6 सितंबर 2012 को नेपा लिमिटेड के लिए स्वीकृत पैकेज में 285 करोड़ में से 157 करोड़ केंद्र सरकार और 128 करोड़ बैंक ऋण के रूप में घोषित किया गया था। इस संबंध में जारी आदेश 25 सितंबर 2012 में स्पष्ट उल्लेख है कि 1997 से लागू होने वाले वेजरिवीजन 6 सितंबर 2012 से लागू होगा और कंपनी प्राेजेक्ट पूरा कर 2007 का वेज-रिवीजन कंपनी स्वयं करें लेकिन प्रोजेक्ट में 3 से 4 वर्ष पिछड़ गया।
प्रबंधन द्वारा भी प्रोजेक्ट की बढ़ी हुई लागत, बकाया सैलरी सपोर्ट और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति मद में 450 करोड़ का संशोधित प्रस्ताव भारी उद्योग मंत्रालय को दिया है जो केबिनेट में स्वीकृति के लिए लंबित है। संघ द्वारा 2007 के वेज रिवीजन को लागू कराने के लिए मान्यनीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक 21499/2017 दिनांक 6 दिसंबर 2017 विचाराधीन है। जिसमें भारत सरकार, मप्र सरकार व नेपा मिल प्रबंधन को प्रतिवादी बनाया गया है।
संघ के अनुसार मिल के कार्मचारी तीन दशकों से कई सुविधाओं से वंचित हैं लेकिन मिल के प्रति समर्पित है को 2007 का वेजरिवीजन लागू कर डीपीआई की गाइड लाइन के अनुसार स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति प्रदान करने की मांग की है। इससे व्यवसायिक रूप से दक्ष विशेषज्ञ कर्मचारी, अधिकारी उपलब्ध हो सकेंगे। मिल के कर्मचारी 1997 के वेतनमान में 2018 की महंगाई में जीने को मजबूर हैं। उस पर आश्रित उच्च शिक्षा, विवाह आैर आदि बुनियादी खर्चे की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।
खाली बैठाकर वेतन देने से अच्छा है वीआरएस दिया जाए
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को दिल्ली में नेपा लिमिटेड को लेकर एक बैठक हुई। इसमें कंपनी के प्रोजेक्ट लागत के एक्सलेशनकास्ट करोड़ों में, बैंक गारंटी, स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति के लिए राशि उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। इसमें मिल के मौजूदा हालात में अधिकांश अफसर, कर्मचारियों के पास कोई काम नहीं है। ऐसे में खाली बैठाकर इन्हें वेतन दिया जा रहा है। इसे देखते हुए इन्हें स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति देकर मासिक वेज बिल में कम करने पर जोर दिया जा रहा है। वैसे भी यदि प्रोजेक्ट पूरा होता है तो इन मशीनों पर वर्तमान कर्मचािरयों से काम लिया जाना संभव नहीं है। इधर नेपा लिमिटेड को लेकर भारी उद्योग मंत्रालय और पीएमओ में बैठक संभावित है।
राशि नहीं होने से मिल में सिविल कार्य बंद पड़े है।
4 हजार से सिमट कर 700 हो गए कर्मचारी
गौरतलब है कि एक समय में नेपा लिमिटेड स्वर्णिम दौर में थी। तब कंपनी में करीब 4 हजार कर्मचारी काम करते थे। कंपनी पर मंडराते संकट के बादलों के चलते वर्ष 2002 में 350 और 2012 में 400 अफसर, कर्मचारियों को वीआरएस दिया गया था। इन 16 सालों के बीच कई कर्मचारी सेवा निवृत्त हुए तो कई की मृत्यु हो गई। माह मई 2018 के अंत तक कंपनी में 697 कर्मचारी, अधिकारी हैं। इनमें से 55 से अधिक उम्र के करीब 394 और 50 से 55 तक उम्र के 174 व 50 से कम उम्र के 129 कर्मचारी, अधिकारी हैं। ऐसे हालात में मिल के विनिवेश में न मिल में और ना ही नगर में विराेध हो पाएगा