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बैराज की दीवार में होल करने आए अफसरों का लोगों ने किया विरोध, समझाइश पर माने

3 वर्ष पहले
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ग्राम अंबाड़ा में बने बैराज से बुरहानपुर तक पानी पहुंचाना है। शनिवार को अफसर बैराज की दीवार में होल करने के लिए पहुंचे। यहां पर आसपास के लोग जमा हो गए। लोगों ने कहा यहां से पानी ले जाएंगे तो हमें परेशानी होगी। किसानों के लिए पानी नहीं रहेेगा। इसके बाद जल संसाधन विभाग के अफसरों ने ग्रामीणों को समझाइश दी। काफी देकर तक कहा सुनी होती रही। ग्रामीणों ने अफसरों को कोर्ट जाने तक की बात कह दी लेकिन कलेक्टर के आदेश और अन्य प्रकार की जानकारी ग्रामीणों को दी गई तो सहमत हो गए।

लोगों ने कहा गांव और आसपास के लोगों को पानी के लिए परेशानी नहीं होनी चाहिए। अफसरों ने आश्वासन दिया कि क्षेत्र में भी पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा। रविवार को जल संसाधन विभाग बायपास की दिवार में ड्रिल कर पानी को बुरहानपुर तक पहुंचाएंगे। बुरहानपुर में जल संकट के कारण जिले के अफसरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए बैराज और तालाबों की ओर रुख किया है। अंबाड़ा के बैराज में करीब 10 फीट और 7 किमी तक बैक वाटर है। इसमें बारिश के बाद झीर के माध्यम से पानी भराव होता रहता है। जल संसाधन विभाग के सहायक यंत्री एनसी मानकर कर्मचारियों के साथ अंबाड़ा पहुंचे। उन्हाेंने डेम से पानी छोड़ने की बात ग्रामीणों से की। इस पर सभी के बीच तीखी बहस हो गई। ग्रामीणों ने बताया लंबे समय से डेम क्षतिग्रस्त हो गया था। कई बार शिकायतें की फिर भी ध्यान नहीं दिया गया। परेशानी से बचने के लिए लोगों ने श्रमदान कर डेम की मरम्मत करवाकर पानी रोका। इससे आसपास के गांव में जल स्तर बना रहेगा और किसान फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। अफसरों ने उन्हें समस्या से अवगत कराते हुए कलेक्टर के आदेशों से अवगत कराया। इसके बाद मामला शांत हुअा।

शनिवार को जल संसाधन विभाग के अधिकारी ने ग्रामीणों से की चर्चा ।

25 गांव में बना रहता है जल स्तर
गांव के राजू तायड़े, दिनेश आसखड़के, जीतू आसखड़के, हरि अप्पा सहित अन्य ने बताया क्षेत्र में सभी गांव जुड़े हैं। लगभग 25 गांव ऐसे है जहां गर्मी के दिनों में इसी बैराज के पानी से जलस्तर बना रहता है। करीब 700 एकड़ में किसान फसल करते हैं। रबी के सीजन में गेंहू की फसल तो हो गई। अब केली, गन्ना, मक्का और तरबूज की फसल है। करीब 400 एकड़ में होती है। 50 किसान करीब 100 एकड़ में गन्ना, 80 एकड़ में मक्का और करीब 70 एकड़ में तरबूज की फसल लगते हैं। गर्मी के दिनों में फसलों की सिंचाई और जल स्तर बनाने की दृष्टि से यह तालाब काफी महत्व पूर्ण होता है।

भास्कर संवाददाता। नेपानगर

ग्राम अंबाड़ा में बने बैराज से बुरहानपुर तक पानी पहुंचाना है। शनिवार को अफसर बैराज की दीवार में होल करने के लिए पहुंचे। यहां पर आसपास के लोग जमा हो गए। लोगों ने कहा यहां से पानी ले जाएंगे तो हमें परेशानी होगी। किसानों के लिए पानी नहीं रहेेगा। इसके बाद जल संसाधन विभाग के अफसरों ने ग्रामीणों को समझाइश दी। काफी देकर तक कहा सुनी होती रही। ग्रामीणों ने अफसरों को कोर्ट जाने तक की बात कह दी लेकिन कलेक्टर के आदेश और अन्य प्रकार की जानकारी ग्रामीणों को दी गई तो सहमत हो गए।

लोगों ने कहा गांव और आसपास के लोगों को पानी के लिए परेशानी नहीं होनी चाहिए। अफसरों ने आश्वासन दिया कि क्षेत्र में भी पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा। रविवार को जल संसाधन विभाग बायपास की दिवार में ड्रिल कर पानी को बुरहानपुर तक पहुंचाएंगे। बुरहानपुर में जल संकट के कारण जिले के अफसरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए बैराज और तालाबों की ओर रुख किया है। अंबाड़ा के बैराज में करीब 10 फीट और 7 किमी तक बैक वाटर है। इसमें बारिश के बाद झीर के माध्यम से पानी भराव होता रहता है। जल संसाधन विभाग के सहायक यंत्री एनसी मानकर कर्मचारियों के साथ अंबाड़ा पहुंचे। उन्हाेंने डेम से पानी छोड़ने की बात ग्रामीणों से की। इस पर सभी के बीच तीखी बहस हो गई। ग्रामीणों ने बताया लंबे समय से डेम क्षतिग्रस्त हो गया था। कई बार शिकायतें की फिर भी ध्यान नहीं दिया गया। परेशानी से बचने के लिए लोगों ने श्रमदान कर डेम की मरम्मत करवाकर पानी रोका। इससे आसपास के गांव में जल स्तर बना रहेगा और किसान फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। अफसरों ने उन्हें समस्या से अवगत कराते हुए कलेक्टर के आदेशों से अवगत कराया। इसके बाद मामला शांत हुअा।

वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली नहीं
उल्लेखनीय है कि शहरों में पानी सहेजने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण अब जल संकट हो रहा है। जबकि पूर्व में भी कई बार वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को निर्माण के दौरान ही अपनाए जाने की बात कहते रहे हैं लेकिन यह मात्र कागजों पर ही रहा। इस प्रकार से जिले सहित नगरीय एवं ग्रामीण अंचलों में निर्माण के दौरान कहीं भी इसका पालन नहीं किया गया है। और ना ही जिम्मेदारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। बेरोकटोक भवनों का निर्माण हुआ। वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली से बारिश के दिनों में बहने वाले पानी को घर में बने हौज में उतारकर जलस्तर बढ़ाया जा सकता है।

इस कारण लोगों ने किया विरोध
बैराज में चार गेट है लेकिन लंबे समय से गेट बंद होने से वे खुल नहीं सके। इसके बाद अफसर-कर्मचारियों के साथ गेट में ड्रिल करने पहुंचे। किसानों ने कहा इस तरह से ड्रिल कर दिया गया तो सभी को परेशानी होगी। अफसर गेट के बीच में करीब 2 फीट गोलाई का होल करने की बात कह रहे हैं लेकिन किसानों का कहना है इस प्रकार से सभी को परेशानी होगी। अगर गेट में किसी प्रकार की दिक्कत हुई तो पानी बहने लगेगा। गरविवार को ग्रामीणों की उपस्थिति में यह काम किया जाएगा। इसके बाद ताप्ती का पानी बुरहानपुर पहुंचेगा। अंबाड़ा से ताप्ती की दूरी करीब 15 किमी है। विभाग उपर से करीब 3 फीट नीचे की ओर बायपास की दिवार से पानी निकासी के लिए होल करेंगे। जिससे दोनों स्थानों पर पानी की आपूर्ति की जा सके।

नहीं होगी परेशानी
ग्रामीणों से चर्चा की गई है। दोनों जगह पर पानी की पर्याप्त मात्रा बनी रहेगी। अत: किसी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न नहीं होने देंगे। सामंजस्य बना रहेगा। बायपास की दिवार से होल कर पानी निकाला जाएगा। आरआर चौहान, एसडीओ जल संसाधन विभाग

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