नेपा मिल को बचाने के लिए नगरवासी सहित अन्य लोग जुटे हंै लेकिन क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ही अनदेखी कर रहे हैं। नेपा मिल पर चर्चा और निर्णय लिए जाने के लिए बैठकंे हो रही हंै। इसमें जनप्रतिनिधि रूचि नहीं ले रहे हैं। उधर, नगरवासी नेपा मिल को बचाने के लिए हर संभव कोशिशंे कर रहे हैं।
रविवार शाम 7 बजे स्टेडियम में नेपा लिमिटेड के लिए बने संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में आकस्मिक बैठक ली गई। इसमें विधायक मंजू दादू नहीं पहुंचीं। अब तक हुई माेर्चे की बैठको में वे अनुपस्थित रहीं। बैठक में पिछले दिनो दिल्ली में निती आयोग, भारी उद्योग मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय में नेपा लिमिटेड को लेकर हुुई बैठको को लेकर चर्चा की गई। मोर्चे के सदस्य अतुल मंडलोई ने कहा पिछले चार साल में केंद्र सरकार ने कोई आर्थिक मदद नहीं की। जनप्रतिनिधियों से उम्मीद ही अब गलत है। इसके लिए हमें संघर्ष करना पड़ेगा। पावर हाउस के प्रभारी सुधीर पटले ने कहा कुछ दिनों से देखने में आ रहा है कि नेपा लिमिटेड के लिए विभिन्न स्तर पर अलग-अलग मांग रखी जा रही है। जिसे केंद्र द्वारा स्वीकार करना संभव नहीं। हम सभी को एकजुट होकर किसी एक मांग पर सहमति जतानी होगी। यदि मिल चलती रहे तो नगर और आसपास के क्षेत्रो की अर्थ व्यवस्था बनी रहेगी। नेपा मिल पर ही नगर का अस्तित्व निर्भर है।
बैठक के दौरान उपस्थित नगरवासी।
भास्कर संवाददाता | नेपानगर
नेपा मिल को बचाने के लिए नगरवासी सहित अन्य लोग जुटे हंै लेकिन क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ही अनदेखी कर रहे हैं। नेपा मिल पर चर्चा और निर्णय लिए जाने के लिए बैठकंे हो रही हंै। इसमें जनप्रतिनिधि रूचि नहीं ले रहे हैं। उधर, नगरवासी नेपा मिल को बचाने के लिए हर संभव कोशिशंे कर रहे हैं।
रविवार शाम 7 बजे स्टेडियम में नेपा लिमिटेड के लिए बने संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में आकस्मिक बैठक ली गई। इसमें विधायक मंजू दादू नहीं पहुंचीं। अब तक हुई माेर्चे की बैठको में वे अनुपस्थित रहीं। बैठक में पिछले दिनो दिल्ली में निती आयोग, भारी उद्योग मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय में नेपा लिमिटेड को लेकर हुुई बैठको को लेकर चर्चा की गई। मोर्चे के सदस्य अतुल मंडलोई ने कहा पिछले चार साल में केंद्र सरकार ने कोई आर्थिक मदद नहीं की। जनप्रतिनिधियों से उम्मीद ही अब गलत है। इसके लिए हमें संघर्ष करना पड़ेगा। पावर हाउस के प्रभारी सुधीर पटले ने कहा कुछ दिनों से देखने में आ रहा है कि नेपा लिमिटेड के लिए विभिन्न स्तर पर अलग-अलग मांग रखी जा रही है। जिसे केंद्र द्वारा स्वीकार करना संभव नहीं। हम सभी को एकजुट होकर किसी एक मांग पर सहमति जतानी होगी। यदि मिल चलती रहे तो नगर और आसपास के क्षेत्रो की अर्थ व्यवस्था बनी रहेगी। नेपा मिल पर ही नगर का अस्तित्व निर्भर है।
मुख्यमंत्री भी नहीं आए आगे
पिछले दिनो नेपा लिमिटेड के अधूरे पड़े रिवाईवल प्रोजेक्ट को लेकर भारी उद्योग मंत्रालय, नीति आयोग एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के मध्य बैठकों के दौर हुए हंै। बैठकों से छन कर आई खबरों के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए मिल को आर्थिक सहायता की संभावना 50-50बताई जा रही है। नेपा लिमिटेड के संबंध में स्थानीय विधायक ही नहीं प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चौहान भी आगे नही आए हैं।
सांसद के प्रयासों के बाद भी संशय की स्थिति
मोर्चे के सचिव सोहन सैनी ने कहा आज की बैठक का उद्देश्य मिल को लेकर नगर और मिल के कर्मचारी क्या चाहते हंै ये जानने के लिए रखी गई है। यदि मिल चलती रही तो सब कुछ ठीक रहेगा। ऐसा नही हुआ तो नगर की व्यवस्था बिगड़ जाएगी। अपराध बढ़ सकते हैं। मिल को बचाने के लिए बने संयुक्त मोर्चे में सांसद नंदकुमारसिंह चौहान, विधायक मंजू दादू को संरक्षक बनाया गया है।
सांसद से रोजाना कंपनी को लेकर चर्चा होती है
मोर्चे के अध्यक्ष संजय विजयवर्गीय ने कहा कि हम सांसद चौहान से सतत संपर्क में हैं रोजाना कंपनी को लेकर चर्चा होती है। इनके द्वारा भी दिल्ली जाकर प्रयास किए गए हैं। अधिकारी एसोसिएशन के सचिव मनोज चौकसे ने मिल के मौज्ूदा हालात पर प्रबंधन से चर्चा के बाद कंपनी को चलाए रखने की मांग रखी। इस अवसर पर डॉ बीपीएस रघुवंशी, विनोदसिंह चौहान, संजय दंडवते, किसन पटेल आदि ने अपने विचार रखे।